मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अब राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके जरिए उन्हें पद से हटाया जा सकता है।
न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक डेमोक्रेट्स आरोप लगा रहे हैं कि ट्रम्प ने अपने पद का इस्तेमाल कर अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया और संपत्ति जुटाई। इससे आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।
डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है कि वे यह पता लगाएंगे राष्ट्रपति रहते हुए ट्रम्प और उनके परिवार की संपत्ति कैसे बढ़ी। उनका फोकस ट्रम्प के बेटों और दामाद जेरेड कुशनर के कारोबारी सौदों पर है।
गार्सिया ने जांच के लिए पांच मुद्दे तय किए हैं। इनमें ट्रम्प परिवार के कारोबारी सौदे, जेफ्री एपस्टीन मामले की जांच में ट्रम्प प्रशासन की भूमिका और अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) की छापेमारी और कार्रवाई शामिल हैं।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स
हाउस में कुल 435 सीटें हैं। सभी सीटों पर चुनाव हुए। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 और ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 151 सीटें जीती हैं। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। डेमोक्रेट्स को जरूरी बहुमत मिल चुका है।
सीनेट
सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी 2 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं।
गवर्नर चुनाव
कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है।
रिपब्लिकन सांसद बोले- ICE की कार्रवाई से पार्टी को नुकसान हुआ
रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मार्लिन स्टुट्जमैन ने माना है कि इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की सख्त कार्रवाई से पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि डिपोर्टेशन पर लगातार जोर देने और ICE की कार्रवाई के चलते लैटिन अमेरिकी वोटर रिपब्लिकन पार्टी से दूर हो गए। स्टुट्जमैन इंडियाना से रिपब्लिकन सांसद हैं।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टुट्जमैन ने कहा कि पार्टी ने दक्षिणी सीमा की सुरक्षा के मुद्दे पर सही बात की, लेकिन अवैध प्रवासियों को देश से निकालने की बात बार-बार उठाने से गलत संदेश गया।
व्हाइट हाउस ने कहा- ईरान जंग पर वेंस के बयान से ट्रम्प नाराज नहीं
अमेरिका में चर्चा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच ईरान जंग को लेकर मतभेद हैं। इसकी वजह वेंस की वह पोस्ट है, जिसमें उन्होंने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान जंग को जिम्मेदार बताया था।
हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने BBC को बताया कि वेंस की पोस्ट जारी होने से पहले ही ट्रम्प को इसकी जानकारी थी। अधिकारी के मुताबिक, ट्रम्प को इस पोस्ट से कोई परेशानी नहीं थी। यही वजह है कि उन्होंने पत्रकारों के सवाल पर वेंस की बात का समर्थन भी किया था।
मैक्सिको की राष्ट्रपति बोलीं- ICE की छापेमारी से ट्रम्प की पार्टी को नुकसान हुआ
मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबॉम ने कहा है कि अमेरिका में प्रवासियों पर छापेमारी और उनके साथ नस्ल के आधार पर भेदभाव की वजह से हिस्पैनिक वोटरों ने ट्रम्प की पार्टी से दूरी बनाई।
उन्होंने कहा कि नस्ल और मूल देश के कारण लोगों को निशाना बनाया गया। इसका असर मिडटर्म चुनाव में हिस्पैनिक वोटरों के फैसले पर पड़ना तय है।
दो साल पहले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प को किसी भी रिपब्लिकन राष्ट्रपति के मुकाबले हिस्पैनिक वोटरों का सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। लाखों हिस्पैनिक वोटरों ने उन्हें वोट दिया था।
संसद में बहुमत गंवाने के बाद भी ट्रम्प के पास कितनी ताकत?
कानून रोक सकते हैं: ट्रम्प संसद से पास होने वाले किसी भी बिल पर वीटो लगा सकते हैं। डेमोक्रेट्स के पास फिलहाल इतने वोट नहीं हैं कि वे
अपने फैसले लागू कर सकते हैं: ट्रम्प सरकारी आदेश जारी कर सकते हैं, इमरजेंसी घोषित कर सकते हैं और सरकारी एजेंसियों को निर्देश दे सकते हैं। विदेश नीति पर भी उनके पास अधिकार रहेंगे।
माफी देने का अधिकार रहेगा: राष्ट्रपति के पास अपराधियों को माफी देने का अधिकार है। अगर ट्रम्प पद छोड़ने से पहले अपने सहयोगियों को माफी देते हैं, तो इस पर राजनीतिक विवाद हो सकता है। इससे पहले जो बाइडेन भी ऐसा कर चुके हैं।
जज और अधिकारियों की नियुक्ति: रिपब्लिकन बहुमत वाली संसद के पास अभी दो महीने हैं। इस दौरान ट्रम्प अपनी पसंद के जज और अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर सकते हैं।
अलास्का में एक नाम के दो उम्मीदवारों पर विवाद
अलास्का के सीनेट चुनाव में डैन सुलिवन नाम के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। एक रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सीनेटर हैं, जिनका मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से है। दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि पेल्टोला और डेमोक्रेटिक पार्टी ने निर्दलीय डैन सुलिवन को इसलिए चुनाव में उतारा, ताकि रिपब्लिकन उम्मीदवार के वोट बंट जाएं। पेल्टोला ने इस योजना की जानकारी होने से इनकार किया है।
ट्रम्प ने इस मामले पर ट्रुथ सोशल पर लिखा कि 'फेक डैन सुलिवन' और डेमोक्रेट्स के दूसरे उम्मीदवार को मिले वोट असली डैन सुलिवन को दे दिए जाने चाहिए। ऐसा होने पर चुनाव खत्म हो जाएगा और सुलिवन आसानी से जीत जाएंगे।
ट्रम्प के साथ काम करने को तैयार मिशिगन सीनेटर अल-सैयद
सीनेटर अब्दुल अल-सैयद ने कहा है कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ भी काम करने को तैयार हैं। MS NOW को दिए इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि क्या वे ट्रम्प के साथ मिलकर काम करेंगे।
अल-सैयद ने कहा,

मैं किसी के भी साथ काम करने को तैयार हूं।

उन्होंने कहा कि यह बदला लेने के बारे में नहीं है। इसका मकसद कानून का पालन कराना और सबसे जरूरी अमेरिकी जनता के लिए काम करना है।
डेमोक्रेट्स को अमेरिकी संसद में 260 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं
CNN के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 1990 के दशक के बाद सबसे बड़ी जीत दर्ज कर सकती है। पार्टी को 260 से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है।
डेमोक्रेट्स एरिजोना की दो सीटों पर बड़े अंतर से आगे हैं। यहां 80% से ज्यादा वोटों की गिनती हो चुकी है। इसके अलावा करीब 12 सीटों पर वे 1 से 5 पॉइंट के अंतर से आगे हैं।
हार के बावजूद ट्रम्प से बेहतर रिश्ता चाहता है चीन
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद भी चीन ट्रम्प के साथ रिश्ते बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी महीने ट्रम्प से मिलेंगे। उनकी कोशिश व्यापार समझौता करने की है।
जिनपिंग की नजर व्यापार समझौते के साथ ताइवान पर भी है। अमेरिका ताइवान को अरबों डॉलर के हथियार दे चुका है। ट्रम्प ने हथियारों की बिक्री पर सवाल उठाए हैं और 14 अरब डॉलर की बिक्री टाल भी दी है।
अब सवाल है कि क्या जिनपिंग व्यापार समझौते के बदले ताइवान पर अमेरिकी रुख नरम करने की मांग करेंगे?
चीन इस बातचीत में सावधानी बरत रहा है। उसे पता है कि एक राष्ट्रपति के साथ हुआ समझौता अगली सरकार बदल सकती है। जानकारों का मानना है कि जिनपिंग ट्रम्प पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहेंगे, क्योंकि इससे बातचीत बिगड़ सकती है।
ट्रम्प पर 2 बार पहले भी महाभियोग लगे
डोनाल्ड ट्रम्प पर उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) के दौरान दो बार महाभियोग चलाया गया था। अमेरिकी इतिहास में वे ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ दो बार महाभियोग की कार्रवाई हुई। हालांकि, दोनों ही बार सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।
पहली बार- यूक्रेन की मदद रोकने पर 2019 में
आरोप था कि ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर दबाव डाला था कि वे जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन के खिलाफ जांच का ऐलान करें। ऐसा न करने पर ट्रम्प ने यूक्रेन को मिलने वाली करीब 40 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद रोक दी थी।
दूसरी बार: कैपिटल हिंसा के बाद 2021 में
6 जनवरी 2021 को ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद भवन कैपिटल पर हमला कर दिया था। ट्रम्प पर अपने भाषण और बयानों से समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था।
हाउस में पास हुआ, सीनेट में फेल
अमेरिका की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है।
हाउस में कुल 435 वोटिंग सदस्य होते हैं।
सभी सदस्य वोट करें, तो कम से कम 218 वोट मिलने पर महाभियोग प्रस्ताव पास हो सकता है।
इसके बाद मामला सीनेट में जाता है।
सीनेट में राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए मौजूद सांसदों में से दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होता है। आमतौर पर सभी 100 सीनेटर मौजूद हों, तो 67 वोट चाहिए।
कम सीटें होने की वजह से ट्रम्प पर महाभियोग कामयाब नहीं हो सका।
ट्रम्प के रक्षा मंत्री पर इस्तीफे का दबाव
रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए उकसाया, लेकिन युद्ध खत्म करने की कोई योजना नहीं बनाई थी।
केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बुधवार को हेगसेथ से इस्तीफा मांगा। अगले हफ्ते प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग भी हो सकती है।
यह मामला ऐसे समय उठा है, जब मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल किया है। चुनाव में ईरान जंग भी वोटरों की नाराजगी की बड़ी वजह रही।
ट्रम्प के पास यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए 2 महीने का मौका
रूसी अखबार 'कोमर्सेंट' ने गुरुवार को लिखा कि अमेरिकी संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण रहने के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले दो महीनों में यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश तेज कर सकते हैं।
अखबार के एक लेख में रूसी सरकार को सलाह दी गई कि वह इस मौके का पूरा फायदा उठाए। हालांकि, रूस ने कहा है कि वह यूक्रेन को लेकर अपनी रणनीति अमेरिका की घरेलू राजनीति के हिसाब से तय नहीं करता।
कोमर्सेंट के मुताबिक, जनवरी में जब अमेरिकी संसद का नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथ में चला जाएगा, तो वे ट्रम्प पर रूस से बातचीत रोकने का दबाव बढ़ा सकते हैं। वे यूक्रेन को अमेरिका की सीधी सैन्य मदद फिर शुरू करने और रूस के साथ-साथ उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर सकते हैं।
ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में डेमोक्रेट्स
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके करीबियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की तैयारी शुरू कर दी है।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि ट्रम्प और उनके परिवार ने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया है। कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प पर तीसरी बार महाभियोग चलाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
डेमोक्रेट्स ट्रम्प परिवार के कारोबार, क्रिप्टोकरेंसी सौदों, सरकारी खर्च और जेफ्री एपस्टीन मामले में सरकार की भूमिका की जांच करना चाहते हैं।
इसके अलावा इमिग्रेशन एजेंसी ICE की छापेमारी, सरकारी खर्च में कटौती के लिए बनाई गई एजेंसी DOGE और ट्रम्प के व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम की भी जांच हो सकती है।
मिसिसिपी में 96% वोटों की गिनती पूरी, फिर भी नतीजे आने में एक हफ्ता लगेगा
अमेरिका के मिसिसिपी में सीनेट चुनाव की गिनती अभी जारी है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलम रिपब्लिकन सांसद सिंडी हाइड स्मिथ से करीब 1,000 वोट आगे चल रहे हैं। अब तक 96% वोटों की गिनती हो चुकी है।
इस चुनाव का नतीजा करीब 15 हजार ऐसे वोटों पर निर्भर है, जिन्हें अभी गिनती में शामिल नहीं किया गया है। इन वोटों को गिनने में अगले हफ्ते तक का समय लग सकता है।
कुछ लोगों को फोटो पहचान पत्र न होने के कारण ऐसे वोट डालने पड़े। उनके वोट तभी गिने जाएंगे, जब वे 10 नवंबर तक जरूरी पहचान पत्र जमा करेंगे।
कुछ वोटरों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले, क्योंकि उन्हें गलती से निष्क्रिय वोटर मान लिया गया था। इसके अलावा, जिन लोगों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म अधूरे थे, उनके वोट भी गिने जाने पर विवाद हो सकता है।
ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की हार की 5 बड़ी वजहें
यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स की प्रोफेसर नताशा लिंडस्टेड के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई वजहें थीं। इनमें शामिल है:
ईंधन की कीमत: ईरान जंग के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं। आम अमेरिकी नाराज थे।
टैरिफ: ट्रम्प के लगाए टैक्स से किसान, ग्रामीण इलाकों के लोग और कई कारोबार प्रभावित हुए।
ICE की छापेमारी: इमिग्रेशन एजेंसी की छापेमारी से भी बड़ी संख्या में अमेरिकी नाराज थे।
एपस्टीन फाइल्स: एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का मुद्दा भी चुनाव में रिपब्लिकन के खिलाफ गया।
ट्रम्प का रवैया: लिंडस्टेड के मुताबिक, ट्रम्प अपनी गलतियां नहीं मानते। वे अपने गलत फैसलों के लिए माफी भी नहीं मांगते।
डेमोक्रेट्स मजबूत हुए, ताइवान को ज्यादा हथियार मिल सकते हैं
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स की ताकत बढ़ने से ताइवान को हथियार मिलने का रास्ता खुल सकता है। अमेरिका का कानून है कि वह चीन के हमले के खतरे से बचने के लिए ताइवान को हथियार और अपनी रक्षा करने में मदद देगा।
लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने करीब 1.33 लाख करोड़ रुपए के हथियार बेचने के समझौते को कई महीनों से टाल रहे हैं। जबकि अमेरिकी संसद इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ ड्रू थॉम्पसन का कहना है कि, चुनाव के बाद अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रम्प पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वे हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे सकते हैं।
हाउस में बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है।
इस बार हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है।
सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी
सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने 20 सीटें जीती हैं। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 सीटें हो गई हैं। अभी 2 सीटों पर फैसला आना बाकी है।
ईरान ने उपराष्ट्रपति वेंस को हारा हुआ जुआरी कहा
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जुआरी बताया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे जुआरी हैं जो हारने के बाद भी खेल छोड़ने को तैयार नहीं होता।
वेंस के बॉस (ट्रम्प) जंग का अगला दौर शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए वेंस को ये बातें अपने बॉस से कहनी चाहिए।
जेडी वेंस के राष्ट्रपति बनने की उम्मीदें कमजोर पड़ीं
BBC के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दोस्त रॉड ड्रेहर का कहना है कि 2028 में राष्ट्रपति बनने का वेंस का मौका अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन तेजी से कम हो रहा है। अगर ईरान के साथ जंग जल्द खत्म नहीं हुई तो रिपब्लिकन पार्टी और वेंस को इसका नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि ट्रम्प को वोट देने वाले लोग इस जंग को अपने साथ धोखे की तरह देख रहे हैं। इससे आम अमेरिकी भी परेशान हैं। जंग के कारण ईरान की सरकार तो नहीं बदली, लेकिन अमेरिका की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की बोले- डेमोक्रेट्स की जीत से पुतिन पर दबाव बनेगा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत से यूक्रेन को ज्यादा मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स यूक्रेन को समर्थन देने और अमेरिका-यूरोप के रिश्ते मजबूत करने की बात साफ तौर पर करते हैं। इसका फायदा यूक्रेन को मिलेगा। जेलेंस्की के मुताबिक, इससे रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर भी दबाव पड़ेगा।
मिडटर्म चुनाव के नतीजों का रूस पर क्या असर पड़ेगा?
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकार पर भी अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर पड़ सकता है। इस बारे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार को कहा,

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे और अपनी विदेश नीति पर काम करते रहेंगे।

उनके बयान से साफ संकेत मिला कि चुनाव के नतीजे चाहे जो हों, रूस को अमेरिका की नीति में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
ट्रम्प ने रूस की हर मांग नहीं मानी है। खासकर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस अपनी शर्तों पर जिस समझौते की उम्मीद कर रहा था, वह अब तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद ट्रम्प की विदेश नीति से रूस को कई फायदे मिले हैं।
हाल ही में ट्रम्प ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों को रोक दिया था। उन्होंने रूस से डीजल खरीदने पर भी सहमति जताई थी।
इसके अलावा, वे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की ज्यादा आलोचना करते रहे हैं, जबकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को लेकर उनका रुख नरम रहा है।
भारतीय मूल के डॉक्टर अमीश शाह ने एरिजोना से अमेरिकी संसद के निचले सदन का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस राज्य से जीतने पहले भारतीय-अमेरिकी हैं।
इसके साथ ही वे इस साल के मिडटर्म इलेक्शन में जीतने वाले छठे भारतवंशी बन गए हैं। शाह ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जे फेली को हराया। फेली नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के पूर्व खिलाड़ी हैं।
दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। शाह को 52.49% वोट मिले, जबकि फेली को 45.45% वोट हासिल हुए।
अमीश शाह का जन्म शिकागो में हुआ था। उनके माता-पिता गुजराती हैं और 1960 के दशक में अमेरिका जाकर बस गए थे। उनके पिता जैन धर्म को मानते हैं, जबकि मां हिंदू हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने माना है कि ईरान के साथ जंग के कारण मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने इसका बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यही एक रास्ता था।
CNBC के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,

ईरान जंग की वजह से कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई थीं। लेकिन अगर मुझे दोबारा फैसला लेने का मौका मिले, तो मैं फिर यही करूंगा।
अपनी ही पार्टी में घिरे ट्रम्प, हार के लिए जिम्मेदार ठहराए गए
रिपब्लिकन पार्टी के टेक्सास से पूर्व कार्यकारी निदेशक चैड विलबैंक्स ने आरोप लगाया कि ट्रम्प के फैसलों से पार्टी को नुकसान हुआ। इसमें ईरान जंग, व्यापार नीति और रूस के राष्ट्रपति पुतिन का पक्ष लेने जैसे फैसले शामिल है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प के कुछ करीबी रिपब्लिकन नेताओं ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को भी इस हार का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि हेगसेथ ने ट्रम्प को ईरान जंग में उलझा दिया, लेकिन इसे खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बनाई।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी कह चुके हैं कि ईरान जंग के कारण 2024 में ट्रम्प को वोट देने वाले कई मतदाता इस बार रिपब्लिकन पार्टी से दूर हो गए।
इसके अलावा,
टेक्सास के रिपब्लिकन नेता डॉन हफाइन्स ने पार्टी नेतृत्व और टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट की नीतियों को हार की वजह बताया।
सासंद चिप रॉय ने विवादित उम्मीदवारों और चुनाव प्रचार पर खर्च को हार की वजह बताया।
रणनीतिकार मैट मैकोविएक ने कहा कि पार्टी ने सीमित वोटर वर्ग पर ज्यादा ध्यान दिया और उसकी चुनावी रणनीति कमजोर रही।
मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि चुनाव नतीजों के बाद ईरान के साथ जंग खत्म हो सकती है।
एशियाई बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 0.9% गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 1.5% गिरकर 86.83 डॉलर प्रति बैरल रही।
जीत के बाद डेमोक्रेट्स के सामने वादे पूरे करने की चुनौती
मिडटर्म में बड़ी जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने अब अपने चुनावी वादे पूरे करने की चुनौती है। पार्टी नेताओं ने महंगाई कम करने और ईरान के साथ जंग खत्म करने को अपनी प्राथमिकता बताया है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि उनकी पार्टी आम लोगों के लिए काम करेगी। उनके अगले हाउस स्पीकर बनने की संभावना है। ऐसा होने पर वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे।
'अगर तुम ब्लैक या यहूदी हो और अब्दुल को वोट देते हो, तो तुम पागल हो। वो एक जिहादी है। वो खतरनाक और हिंसक जिहादी है।'
ये शब्द अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैं, जो उन्होंने अब्दुल अल-सैयद के बारे में कहे थे। मिडटर्म चुनाव नतीजों में 52% से ज्यादा मतों के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।