भोपाल। राजधानी भोपाल में मंगलवार की शाम आसमान में एक अद्भुत और रोमांचक खगोलीय घटना का गवाह बनी। आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल में साल के आखिरी ”सुपरमून अवलोकन कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया, जहां हजारों की संख्या में नागरिकों, स्कूली बच्चों और खगोल विज्ञान प्रेमियों ने भाग लिया। लोगों ने शक्तिशाली दूरबीनों के माध्यम से चंद्रमा की सामान्य से कहीं अधिक चमकीली और विशाल आकृति का दर्शन किया, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब लगभग तीन लाख 60 हजार किलोमीटर की दूरी पर था। यही कारण है कि चंद्रमा अपने सामान्य आकार से अधिक बड़ा और चमकदार दिखाई दिया, जिसे विज्ञान की भाषा में सुपरमून कहते हैं। यह दुर्लभ अवसर खगोल प्रेमियों के लिए किसी पर्व से कम नहीं था। चंद्रयान-3 की कामयाबी का दिखा उत्साह इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ गया, क्योंकि पूरा देश अभी भी भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन की सफलता का जश्न मना रहा है
युवाओं में जबरदस्त उत्साह दिखा
भारत के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने के बाद से ही, आम लोगों और खासकर युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति एक नई दीवानगी और जिज्ञासा देखने को मिल रही है। आंचलिक विज्ञान केन्द्र में जुटे युवाओं में भारत की भावी अंतरिक्ष योजनाओं और चंद्रमा अन्वेषण को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखा। उन्होंने विशेषज्ञों से यह जानने का प्रयास किया कि सुपरमून बनने के पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है, और कैसे भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ रहा है।
चंद्रमा को करीब से देखना अविश्वसनीय अनुभव
केन्द्र के क्यूरेटर ”ई” एवं परियोजना समन्वयक, साकेत सिंह कौरव ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल लोगों को उज्ज्वल सुपरमून की सुंदरता से परिचित कराना था, बल्कि युवाओं के मन में खगोल विज्ञान के प्रति नई जिज्ञासाएं उत्पन्न करना भी था। कार्यक्रम में आए एक स्कूली छात्र ने कहा कि चंद्रमा को इतना करीब से देखना एक अविश्वसनीय अनुभव था। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद मुझे अब लगता है कि अंतरिक्ष में जाना मुमकिन है।