मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 130 से ज्यादा सरकारी मकानों पर कर्मचारियों और अधिकारियों का कब्जा है। यहां आईएएस अधिकारियों से लेकर क्लास टू और क्लास फोर्थ कर्मचारी रहते हैं। इनमें से कुछ का ट्रांसफर हो चुका है तो कुछ रिटायर हो चुके हैं। इसके बाद भी ये सरकारी मकान खाली करने को तैयार नहीं हैं। जबकि सरकारी आवास के लिए 1 हजार से ज्यादा एप्लिकेशन पेंडिंग हैं।
कई बार इन अधिकारी-कर्मचारियों को मकान खाली करने के नोटिस थमाए गए, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। लिहाजा पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि अगर कोई अधिकारी रिटायरमेंट के 9 महीने बाद भी सरकारी मकान खाली नहीं करेगा, तो उससे 30 गुना किराया वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, बेदखली की कार्रवाई भी की जाएगी। जो अधिकारी और कर्मचारियों ने खाली नहीं किए हैं और उन्हें नोटिस थमाया गया है। पड़ताल में पता चला कि कुछ अधिकारियों का ट्रांसफर हुए 10 महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है और वो रेस्ट हाउस की तरह इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो कुछ ने अपने परिवारों को यहीं पर रखा है।
पहले जानिए, क्यों पड़ी नियम बदलने की जरूरत… भोपाल में लगभग 12,000 सरकारी आवास हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जिन्हें वाकई इनकी जरूरत है, वे आवंटन के लिए महीनों और कभी-कभी सालों तक इंतजार करते रहते हैं। जिन अधिकारी और कर्मचारियों के ट्रांसफर होते हैं, वो इन्हें खाली नहीं करते तो कुछ रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी मकानों में जमे रहते हैं।
जबकि नियम है कि ट्रांसफर होने पर मकान खाली करने के लिए 6 महीने और रिटायरमेंट पर 3 महीने का समय दिया जाता है। इसके बाद भी मकान खाली नहीं किया जाता तो संपदा संचालनालय दोगुना किराया वसूल करता था। यह राशि इतनी कम थी कि रसूखदार अधिकारी इसे आसानी से चुका देते थे और बंगले पर कब्जा बनाए रखते थे।
कैबिनेट ने जुर्माने की राशि दोगुने से 30 गुना बढ़ाई सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि अगर कोई अधिकारी रिटायरमेंट के 9 महीने बाद भी सरकारी मकान खाली नहीं करेगा, तो उससे 30 गुना किराया वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, बेदखली की कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए नियम भी तैयार किए हैं…
- पात्रता खत्म होने (ट्रांसफर/रिटायरमेंट) के तीन महीने तक सामान्य किराया लगेगा।
- अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया भरना होगा।
- छह महीने के बाद भी घर खाली नहीं किया तो दंडात्मक कार्रवाई के तहत 30 गुना तक किराया वसूला जाएगा।
हालांकि, संपदा संचालनालय के अधिकारियों का कहना है कि इस नियम की अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह नियम पिछली तारीख से (यानी जब से कब्जा अवैध हुआ है) लागू होगा या अधिसूचना जारी होने की तिथि से।
वो अफसर, जिन्होंने नोटिस के बाद भी मकान खाली नहीं किए भास्कर की टीम ने जब इन अवैध कब्जाधारियों की पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले नाम और मामले सामने आए। ये वे अधिकारी हैं, जो जनता को नियमों का पालन करने की सीख देते हैं, लेकिन खुद उन पर अमल करना जरूरी नहीं समझते।