रायपुर, राजधानी रायपुर में आपके घर तक जल्द से जल्द सामान पहुंचाने वाले ब्लिंकिट के करीब 600-700 डिलीवरी ब्वॉयज हड़ताल पर चले गए है। वजह यह है कि उन पर 10 मिनट में सामान पहुंचाने कंपनी का दबाव है और पेमेंट भी कम कर दिया जा रहा है।
डिलीवरी ब्वॉयज का कहना है कि लोगों को 10 मिनट में सामान मिले इसके लिए वे तेजी से गाड़ी दौड़ाते हुए लोगों के घर पहुंचते है। इस दौरान एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही लूट और कुत्ते काटने जैसी भी घटना हो चुकी है। डिलीवरी ब्वॉयज की नाराजगी इसलिए भी है क्योंकि कंपनी से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती।
टूटी हड्डियां, नहीं मिला मेडिकल क्लेम
संजय दीप बताते हैं – “30 जून को डिलीवरी पूरी करने के बाद मैं लौट रहा था, तभी बाइक फिसल गई। पैर फ्रैक्चर हो गया। दो हफ्ते घर पर रहना पड़ा। कंपनी को बताया तो कहा गया कि मेडिकल क्लेम मिल जाएगा, लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली। उल्टा, कई बार फोन करने पर जवाब मिला – ‘आपको खुद संभालना होगा।’”
लूट के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
एक और राइडर संजय कुमार बताते हैं – “रात करीब 11 बजे डिलीवरी खत्म कर लौट रहा था, तभी पांच लोगों ने रास्ते में घेर लिया। मोबाइल और 3 हजार रुपए लूट लिए। FIR करवाई, कंपनी को भी जानकारी दी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। एक डिलीवरी पर मुश्किल से 50-60 रुपए मिलते हैं, ऐसे में 3 हजार का नुकसान बहुत बड़ा है।”
डिलीवरी के दौरान कुत्ते ने काट लिया
एक डिलीवरी ब्वॉय बताते हैं – “मैं एक कॉलोनी में ऑर्डर देने गया था। जैसे ही गेट पर पहुंचा, कुत्ता भागकर आया और काट लिया। खून निकल आया, इंजेक्शन खुद लगवाना पड़ा। कंपनी को जानकारी दी गई लेकिन से न कोई फोन आया, न कोई पूछताछ।”
10 मिनट का टारगेट, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं
राइडर्स का कहना है कि कंपनी उनसे ’10 मिनट में डिलीवरी’ पूरी करने का दबाव बनाती है। कई बार बारिश, ट्रैफिक या रात के अंधेरे में यह मुश्किल हो जाता है, लेकिन फिर भी समय सीमा तय है।
एक राइटर नीरज तांडी की पैर की हड्डियां टूट गई हैं, पिछले दो महीने से इलाज चल रहा है लेकिन कोई मदद नहीं मिली। राइडर्स का कहना है कि जब ’10 मिनट में पुलिस या एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, तो हम कैसे पहुंच सकते हैं?’
10 मिनट का टारगेट, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं
राइडर्स का कहना है कि कंपनी उनसे ’10 मिनट में डिलीवरी’ पूरी करने का दबाव बनाती है। कई बार बारिश, ट्रैफिक या रात के अंधेरे में यह मुश्किल हो जाता है, लेकिन फिर भी समय सीमा तय है।
एक राइटर नीरज तांडी की पैर की हड्डियां टूट गई हैं, पिछले दो महीने से इलाज चल रहा है लेकिन कोई मदद नहीं मिली। राइडर्स का कहना है कि जब ’10 मिनट में पुलिस या एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, तो हम कैसे पहुंच सकते हैं?’