इंदौरः नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या जैसे दिल दहला देने वाले अपराध में आरोपी मौसा को जिला अदालत ने कड़ी सजा सुनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे मामलों में नरमी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने आरोपी को तीन अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए हर धारा में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने पीड़िता के माता-पिता को तीन लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा भी की है।अदालत ने फैसले में टिप्पणी की कि आरोपी रिश्ते में मौसा था और उसने भरोसे तथा रिश्ते दोनों को कलंकित करते हुए 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। यह घटना दिखाती है कि आज के समय में महिलाएं और बेटियां केवल बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर रिश्तेदारों के बीच भी सुरक्षित नहीं हैं। अदालत ने कहा कि जिस मानसिक विकृति और क्रूरता के साथ अपराध को अंजाम दिया गया, वह दर्शाता है कि आरोपी के प्रति किसी भी तरह की नरमी न्यायसंगत नहीं होगी।
कैसे सामने आया खौफनाक सच
यह वारदात 21 जून 2022 की है। किशोरी के पिता ड्राइवर थे और उस दिन काम से बाहर गए थे। मां अपनी दोनों बेटियों के साथ मजदूरी पर गई हुई थी, जबकि बेटा खेलने निकल गया था। शाम को जब मां घर लौटी तो बेटी घर से गायब थी। इसी बीच पास के कमरे में रहने वाले मौसा के कमरे का दरवाजा बंद मिला। कई बार आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया।
कमरे का नजारा दहलाने वाला
अंदर का दृश्य किसी भी इंसान को झकझोर देने वाला था। लड़की का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था और उसी के पास मौसा भी घायल अवस्था में पड़ा मिला। उसके गले पर चोट के निशान थे और कमरे में हर तरफ खून फैला हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पीएम रिपोर्ट में सामने आई दरिंदगी
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि किशोरी के गले, चेहरे और पेट पर चोटों के गहरे निशान थे। उसके प्राइवेट पार्ट से भी खून निकलने की पुष्टि हुई, जिससे दुष्कर्म की बात साफ हो गई।
फोरेंसिक जांच ने खोले राज
कमरे से खून के सैंपल, सब्जी काटने वाला चाकू, ब्लेड और साड़ी का टुकड़ा जब्त किया गया। घर के दोनों दरवाजे अंदर से बंद मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वारदात कमरे के भीतर ही हुई। पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों के बयान लेने के बाद परिस्थितिजन्य साक्ष्य जोड़े। जांच में पता चला कि आरोपी ने सबूत छिपाने और गुमराह करने के लिए खुद को भी चोट पहुंचाई।
कमजोर गवाहों के बावजूद साबित हुआ अपराध
सुनवाई तीन साल तक चली। खास बात यह रही कि माता-पिता कोर्ट में पूरी तरह अभियोजन का समर्थन नहीं कर पाए और उनके बयान कमजोर रहे। बावजूद इसके, फोरेंसिक रिपोर्ट, पीएम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी की भूमिका को पुख्ता साबित कर दिया।