पाकिस्तान और अफगान तालिबान में अब जंग ही विकल्प? सऊदी अरब में दोनों पड़ोसियों की बातचीत टूटी, बड़ा खतरा

इस्लामाबाद/काबुल: अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने की हर कोशिश नाकाम होती दिख रही है। अब तालिबान और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच सऊदी अरब में बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। अफगान इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए सऊदी अरब गया था। इसके पहले तुर्की के इस्तांबुल में हुई अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच चली कई दिनों की बैठक बिना किसी सहमति के खत्म हो गई थी। अफगानिस्तान और तालिबान के बीच अक्टूबर में तनाव भड़क गया था और दोनों के बीच बॉर्डर पर सैन्य झड़पें हुई थीं।

अफगानी मीडिया आउटलेट अफगान इंटरनेशनल ने बताया कि सऊदी अरब के लिए गए तालिबान डेलीगेशन में उप गृहमंत्री रहमतुल्लाह नजीब, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी और तालिबान के वरिष्ठ नेता अनस हक्कानी शामिल थे। सऊदी अरब ने पहले दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थता की इच्छा का संकेत दिया था।

इस्तांबुल में बैठक हुई थी नाकाम

तालिबान अधिकारियों ने बातचीत पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। इसके पहले दो इस्तांबुल में दो दौर की बैठक हुई थी, जिनका कोई नतीजा नहीं निकला था। कतर और तुर्की की मध्यस्थता में तीन दौर की बातचीत हुई थी, जिसमें पहले दोहा और बाद के दो दौर की बैठक की मेजबानी तुर्की ने की थी। दोहा में पहले राउंड में सीजफायर पर सहमति बनी थी।

जंग का मंडरा रहा खतरा

पाकिस्तान और अफगान तालिबान दोनों ने स्वीकार किया था कि इस्तांबुल की बैठक बेनतीजा रही थी और दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचने में नाकाम रहे थे। हालांकि, दोनों पक्ष 19 अक्टूबर को लागू हुए युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए थे। लेकिन अब सऊदी अरब में बिना किसी नतीजे के खत्म होने के बाद अब एक बार फिर दोनों पड़ोसियों में जंग का खतरा मंडराने लगा है। खासतौर पर पिछले महीने के आखिर में अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक से काबुल की तालिबान सरकार गुस्से में है। तालिबान ने पाकिस्तान को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है और बदला लेने की कसम खाई है।

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