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कमलनाथ सरकार में छह साल पहले जारी किया गया एक आदेश 2019 के बाद तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के रूप में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को चार लाख रुपए तक का नुकसान करा रहा है। परिवीक्षा अवधि के वेतन में हो रहे इस नुकसान को रोकने के लिए कर्मचारी नेताओं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से इस आदेश को निरस्त करने और परिवीक्षा अवधि तीन साल की बजाय दो साल करने की मांग की है। कांग्रेस सरकार का यह आदेश काम एक समान लेकिन वेतन में लाखों नुकसान पहुंचाने वाला है।

कांग्रेस सरकार में जारी आदेश कर्मचारियों के साथ नैसर्गिक न्याय का विरोध करता है क्योंकि लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को दो साल की परिवीक्षा अवधि और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से नियुक्ति पाने वाले को तीन साल की परिवीक्षा अवधि का सामना करना पड़ता है और यही उनके नुकसान की वजह बनता है।

3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि किए जाने का आदेश

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि वर्ष 2019 में कांग्रेस सरकार लोक सेवा आयोग द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं को छोड़कर नवनियुक्त कर्मचारियों को 2 वर्ष के स्थान पर 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि किए जाने का आदेश जारी किया गया था।

इस आदेश के चलते नवनियुक्त कर्मचारियों को पहले, दूसरे और तीसरे साल में 70%, 80%, 90% वेतन दिया जा रहा है। चौथे वर्ष में परिवीक्षा अवधि समाप्त होने पर 100% वेतन दिया जाता है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि 3 वर्ष बाद नव नियुक्त कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दिया जाता है। सरकार का यह आदेश नव नियुक्त कर्मचारियों का लाखों रुपए का नुकसान करा रहा है।

तिवारी कहते हैं कि 12 दिसंबर 2019 को जारी आदेश के बाद शासकीय सेवा में आने वाले कर्मचारियों को लाखों रुपयों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह नियम भी केवल कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती होने वाले कर्मचारियों पर ही लागू होता है।

जो कर्मचारी मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से भर्ती होते है, उन्हें परिवीक्षा अवधि खत्म होने पर प्रथम वर्ष से पूर्ण वेतन दिया जाता है और उनकी परिवीक्षा अवधि भी 2 वर्ष की है। इस तरह एक ही प्रदेश में दो तरह के नियम लागू हैं। ऐसा होने से न्याय के सिद्धांत का भी हनन हो रहा है।

ऐसे समझें कर्मचारियों का नुकसान

  • जनवरी 2023 में जो कर्मचारी सेवा में आया है। उसे दिसंबर 25 तक 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 90% वेतन मिलने पर इस तरह का नुकसान होगा।
  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का मूल वेतन 15500 रुपए और नुकसान 174840 रुपए होता है।
  • तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को 1800 मूल वेतन पर 201540 रुपए का नुकसान हो रहा है।
  • इसी वर्ग के 19500 मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी को 219420 रुपए का नुकसान होता है।
  • तृतीय श्रेणी के 25500 मूल वेतन कर्मचारी को 285085 रुपए का घाटा हो रहा है।
  • तृतीय श्रेणी का जो कर्मचारी 28700 मूलवेतन पर काम शुरू करता है उसे 323258 का नुकसान हो रहा है।
  • इसी वर्ग का जो कर्मचारी 36200 मूल वेतन पर शासकीय सेवा शुरू करता है उसे 407078 रुपए तक का नुकसान हो रहा है।

सीएम को लिखा पत्र, दो साल हो परिवीक्षा अवधि

कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश शासन की सेवा में आने वाले चतुर्थ श्रेणी, तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को पूर्व की तरह 2 वर्ष की परिवीक्षा लागू करने की मांग की है ताकि कर्मचारियों को लाखों रुपए का नुकसान कम किया जा सके।

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