इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के अनुसार मकर संक्रांति सूर्योदय कालीन पर्व माना जाता है। जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हुए उदित होता है, उसी दिन यह पर्व मनाने का विधान है।
संस्थान के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का क्षण अपराह्न काल, यानी दोपहर के बाद पड़ रहा है। ऐसे में 15 जनवरी को सूर्य का उदय मकर राशि में होगा। इसी कारण देशभर में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
पर्व के साथ ही ब्रह्म मुहूर्त से स्नान, दान और पुण्य काल की शुरुआत हो जाएगी। मान्यता है कि संक्रांति काल में पवित्र नदियों और जलाशयों में स्नान करना विशेष फलदायी होता है। मकर संक्रांति का स्नान रोग नाशक माना गया है।
इस दिन तिल, कंबल और गर्म वस्तुओं के दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। संक्रांति उत्सव में पतंग उड़ाने की परंपरा का उल्लेख रामचरितमानस में भी मिलता है, जिसका संबंध हनुमान से जोड़ा जाता है। मकर संक्रांति के बाद शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है।
इस दिन कई श्रद्धालु उत्तरायण सूर्य का व्रत रखते हैं। मकर संक्रांति के अधिष्ठाता देव भगवान सूर्य माने जाते हैं।
इसी पर्व के साथ ठंड का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और खेतों में हरियाली, फसलों और फूलों से प्रकृति मनोहारी रूप धारण करती है। यह पर्व उल्लास और आनंद का संदेश देता है।