मकर संक्रांत पर भोपाल के बाजारों में पतंग-मांझे की बिक्री तेज, प्रतिबंधों के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा… चेकिंग नदारद

भोपाल: भोपाल में वैसे तो लोग पूरे साल शौकिया पतंगबाजी करते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर्व पर इसकी परंपरा विशेष रूप से पुरानी और लोकप्रिय है। इस अवसर पर न सिर्फ बच्चे बल्कि किशोर और बड़े भी पतंगबाजी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बाजारों में पतंग की दुकानों पर रौनक बढ़ जाती है और प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता है।

चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध, लेकिन कारोबार जारी

मकर संक्रांति के दौरान हर साल चाइनीज मांझे का मुद्दा भी सामने आता है। इस खतरनाक मांझे पर पुलिस द्वारा प्रतिबंध के आदेश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। नतीजतन गली-मोहल्लों, घरों और किराना दुकानों से भी इसका कारोबार संचालित होता रहता है।

इतवारा बाजार: भीड़ और तेज मांझे की बिक्री

स्थान: इतवारा बाजार, समय: 3.34 बजे

मंगलवार को एक पतंग की दुकान पर भारी भीड़ नजर आई। यहां एक ग्राहक ने करीब 300 रुपये में मांझे की चकरी खरीदी। ग्राहक ने बताया कि यह मांझा बेहद तेज है और पतंग काटने में कारगर साबित होता है। हालांकि पुलिस की ओर से कोई चेकिंग नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मांझा चाइनीज है या सादा।

आजाद मार्केट: धारदार मांझे से दुकानदार तक घायल

स्थान: आजाद मार्केट, समय: 3.42 बजे

आजाद मार्केट की पतंग दुकानों पर भी खरीदारों की भारी भीड़ देखी गई। यहां दुकानदारों द्वारा धारदार और खतरनाक मांझा बेचा जा रहा था। मांझा लपेटते समय दुकानदार के हाथों में निशान तक आ गए, जिससे इसकी धार का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि दुकानदार का दावा था कि वह सादा मांझा ही बेच रहा है।

नवबहार सब्जी मंडी: पुरानी दुकान, महंगे मांझे

स्थान: नवबहार सब्जी मंडी, समय: 4.24 बजे

नवबहार सब्जी मंडी क्षेत्र में बड़ी मस्जिद से संचालित शहर की सबसे पुरानी पतंग दुकान पर भी भीड़ लगी थी। ग्राहकों ने बताया कि यहां सादा मांझा ही बेचा जा रहा है। दुकान पर 300 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक की मांझा चकरियां उपलब्ध थीं और ग्राहकों की मांग पर बिक्री की जा रही थी।

पुलिस चेकिंग नदारद

तीनों ही स्थानों पर सबसे अहम बात यह सामने आई कि कहीं भी पुलिस या प्रशासन की कोई जांच टीम मौजूद नहीं थी। इससे प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की रोकथाम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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