नई दिल्ली: इस समय विदेशों में रियल एस्टेट में निवेश (Real Estate Investment) का चलन बढ़ा है। अब उद्योगपति या कारोबारी ही नहीं, प्रोफेशनल्स और नौकरीपेशा लोग भी विदेश में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं, जैसे बच्चों की पढ़ाई विदेश में होना या फिर अपने पैसे को अलग-अलग जगहों पर लगाना ताकि रिस्क कम हो। इनके लिए इस बार के बजट में भी घोषणा हुई है। इस बारे में जानते हैं चार्टर्ड अकाउंटेंट सी. कमलेश कुमार से।
- विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदने के नियम क्या हैं?
अगर आप भारत के नागरिक हैं और विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आपको RBI की LRS यानी Liberalised Remittance Scheme का पालन करना होगा। रिजर्व बैंक (RBI) की इस स्कीम के तहत, कोई भारतीय किसी वित्तीय वर्ष में अधिकतम $2,50,000 ही विदेश भेज सकते हैं। ऐसा देखा गया है कि परिवार के सदस्य मिलकर अपने LRS की लिमिट का इस्तेमाल कर लेते हैं। और फिर विदेश में एक प्रॉपर्टी खरीद लेते हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि आप चाहें तो किश्तों में भी पेमेंट कर सकते हैं। लेकिन, हर बार भेजी गई रकम साल की लिमिट के अंदर होनी चाहिए। साथ ही यह ट्रांसफर बैंकिंग चैनल से ही होना चाहिए। दरअसल, Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) के नियमों का पालन करने के लिए सही कागजात रखना बहुत जरूरी है। - विदेशी प्रॉपर्टी से आमदनी भारत में टैक्स लगेगा?
अब आपके मन में सवाल उठता होगा कि जब विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदी है तो उससे कुछ आमदनी भी होगी। उस पर कराधान के नियम क्या हैं। तो आप जान लें कि विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई, भारत में रहने वाले लोगों के लिए यहां टैक्सेबल (कर योग्य) होती है। इसमें इसके कोई मायने नहीं होते कि किराये का भुगतान भारत में किया गया है या विदेश में। अगर आपको विदेश से किराया मिलता है, तो आपको इसकी जानकारी अपने भारतीय टैक्स रिटर्न में देनी होगी, भले ही उस पर विदेश में टैक्स लग चुका हो। अगर किसी आमदनी पर दो देशों में टैक्स लगता है, तो भारत के टैक्स ट्रीटी (Double Taxation Avoidance Agreements-DTAA) के तहत आपको विदेश में भरे गए टैक्स का क्रेडिट मिल सकता है। - इसे एक उदाहरण से समझा सकते हैं?
मान लीजिए, आप भारत के निवासी हैं। आपने यूके के किसी शहर में एक प्रॉपर्टी खरीदी है। वहां आपको प्रॉपर्टी से हर महीने किराया मिलता है। चूंकि आप भारत के निवासी हैं, इसलिए यह किराया भारत में भी टैक्सेबल होगा। आपको किराये की आमदनी यूके से हुई है तो उस किराए पर टैक्स भी वहां की सरकार वसूलेगी। ऐसे में, आप भारत में उस किराए पर लगने वाले टैक्स में से यूके में भरे गए टैक्स को घटा सकते हैं। इसे ही फॉरेन टैक्स क्रेडिट कहते हैं। इससे आपकी आय पर दोहरा कर नहीं लगेगा। बस, आपको यूके में टैक्स भरने का सबूत दिखाना होगा। - विदेशी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बैंकों से लोन मिलेगा? इस लोन पर इनकम टैक्स में छूट मिलेगी?
विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लिए आप बैंक से नियमानुसार लोन भी ले सकते हैं। बैंकों से लिए गए लोन पर आज जो ब्याज चुकाते हैं, उस पर आप टैक्स में छूट का क्लेम कर सकते हैं। लेकिन यहां यह देखना होगा कि वह तय लिमिट के अंदर हो। - विदेशों की प्रॉपर्टी बेचने पर क्या होता है?
अगर आप विदेश में खरीदी हुई प्रॉपर्टी बेचते हैं और इस सौदे में आपको मुनाफा होता है, तो उस पर होने वाले कैपिटल गेन पर भी भारत में टैक्स भरना होगा। यहां भी टैक्स ट्रीटी के तहत फॉरेन टैक्स क्रेडिट का फायदा मिल सकता है, जिससे डबल टैक्सेशन से बचा जा सकता है। यह याद रखना बहुत जरूरी है कि विदेश में खरीदी गई सभी प्रॉपर्टी की जानकारी आपको अपने भारतीय टैक्स रिटर्न में देनी होगी। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो Black Money Act, 2015 के तहत आप पर भारी जुर्माना लग सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए, नियमों का पालन करना और सारी जानकारी सही-सही देना बहुत ही महत्वपूर्ण है। - Foreign Property पर इस बार बजट में क्या प्रावधान हुआ है?
सरकार ने इस बजट में Black Money (Undisclosed Foreign Income and Assets) Act, 2015 में बदलाव का प्रस्ताव किया है। पहले विदेशी संपत्ति के घोषणा नहीं करने पर एक समान 30 फीसदी टैक्स और 120 फीसदी पेनाल्टी का नियम था। अब एक करोड़ रुपये तक की प्रॉपर्टी पर वन-टाइम वॉलेंटरी डिस्क्लोजर विंडो खोला गया है। इस पर नियमानुसार टैक्स और पेनाल्टी भर कर उसका रेगुलराइजेशन कर सकते हैं। यदि प्रॉपर्टी की कीमत 5 करोड़ रुपये तक है और उससे होने वाली आमदनी पर टैक्स तो लग गया है लेकिन उसकी रिपोर्टिंग नहीं हुई है तो इसमें लिमिटेड इम्यूनिटी प्रदान की गई है।