सिंगरौली का बगदरा अभयारण्य होगा डिनोटिफाई, अब पर्यटन पर जोर देगी MP सरकार

भोपाल। वर्ष 1977 में बना सिंगरौली का बगदरा अभयारण्य सामान्य वन क्षेत्र घोषित होगा। यानी इसे डिनोटिफाई कर अभयारण्य का दर्जा हटाया जाएगा। इसकी वजह यह कि अभयारण्य में वन आवरण बीच-बीच में बहुत कम हो गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 470 वर्ग किमी है, जिसमें 64 गांव आते हैं। डिनोटिफिकेशन का निर्णय सोमवार को राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है।

बैठक में संजय टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के विस्तार का प्रस्ताव भी रखा गया था, पर इसे हरी झंडी नहीं मिली है। इसमें तय हुआ कि स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करना चाहिए। वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में हो रहे बेहतर कार्यों के चलते प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या बढ़ी है।

ऐसे में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व को प्रोत्साहित करने के लिए जनजागरूकता और सतर्कता आवश्यक है। इसके लिए वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग से समन्वय कर प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। बैठक में पन्ना टाइगर रिजर्व, पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, सतपुड़ा-पेंच टाइगर रिजर्व कारीडोर से संबंधित वन्य जीव अनुमतियों का अनुमतियों का अनुमोदन किया गया।

बदले में दूसरे राज्यों से भी वन्य प्राणी लेंमुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश से अन्य राज्यों को वन्य जीव उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बदले में उन राज्यों से भी वन्य जीव प्रदेश में लाए जाएं। इससे प्रदेश में वन्य जीवों की विविधता बढ़ेगी। वन्य जीव प्रबंधन में अन्य राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों को भी अपनाने की बात उन्होंने कही। विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थाओं को जोड़कर वन और वन्य जीव के संबंध में अध्ययन प्रक्रिया को करने, वन क्षेत्र में विद्यमान पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की श्रेष्ठ व्यवस्था करने के निर्देश उन्होंने दिए।

बैठक मे हाथियों पर केंद्रित पर्यटन गतिविधियां संचालित करने के संबंध में चर्चा हुई। सीएम ने कहा, सर्पदंश की घटनाओं में प्रभावितों की जान बचाने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दो व्यक्तियों को सांप पकड़ने तथा प्रभावित को बचाने के लिए प्रारंभिक रूप में सहायता करने के लिए शिक्षण उपलब्ध कराया जाए। डाग स्क्वाड में देशी नस्ल के डाग शामिल करने के लिए भी पहल करने के लिए कहा।

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