नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि बैंकों को ग्राहकों को गुमराह करके बीमा सहित फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स पकड़ाने की हरकतों से बाज आना चाहिए। सीतारमण ने कहा कि बैंकों को जमा जुटाने और कर्ज देने के अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान लगाना चाहिए।उन्होंने कहा कि बैंकों को अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहिए। सीतारमण ने कहा कि ग्राहकों के पास पहले से बीमा होने पर भी बैंक उनसे बीमा उत्पाद खरीदने को कहते हैं और आरबीआई यह सोचकर इस पर नजर नहीं रखता था कि यह तो बीमा रेगुलेटर IRDAI के दायरे की बात है। दूसरी ओर, IRDAI को लगता रहा कि बैंक तो आरबीआई से रेगुलेट होते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि ग्राहक कहता है कि उसे बीमा लेने को क्यों कहा जा रहा है, जब वह होम लोन लेने के लिए अपनी प्रॉपर्टी गिरवी के रूप में बैंक को दे ही रहा है? सीतारमण ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि आरबीआई मिस सेलिंग के बारे में गाइडेंस ला रहा है। बैंकों को संदेश जाना चाहिए कि वे मिस सेलिंग नहीं कर सकते।’
क्या हैं ड्राफ्ट नियम?
- 11 फरवरी को आरबीआई ने ‘मिस सेलिंग’ (गलत तरीके से सामान बेचना) पर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए थे। इसमें कहा गया है कि अगर बैंक किसी ग्राहक को गलत तरीके से कोई प्रोडक्ट या सर्विस बेचते हैं, तो उन्हें ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। ये नियम 1 जुलाई से लागू होंगे।
- वित्त मंत्री ने बैंकों को फटकार लगाते हुए कहा कि बैंक बीमा बेचने में ज्यादा और बैंकिग के मुख्य काम में कम समय दे रहे है।
- उन्होंने कहा कि बैंकों को सलाह दी गई है कि वे सेविंग्स और करंट अकाउंट डिपॉजिट बढ़ाने पर फोकस करें।
गोल्ड प्राइस पर नजर
सीतारमण ने कहा कि सोने के बढ़ते भाव पर सरकार और आरबीआई की नजर है, लेकिन कीमतें ऐसी नहीं है कि चिंता की स्थिति बन जाए। उन्होंने कहा कि भाव मुख्य रूप से इसलिए चढ़ रहे हैं क्योंकि दुनियाभर में केंद्रीय बैंक काफी सोना खरीद रहे हैं। दिल्ली में आरबीआई बोर्ड को संबोधित करने के बाद सीतारमण ने कहा कि त्योहारों में भारत में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ती है, साथ ही अधिकतर देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना-चांदी खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारी इस पर नजर है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह चिंताजनक स्थिति तक पहुंच गया है।’
‘PSU बैंकों के विलय की योजना नहीं’
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के पास पब्लिक सेक्टर बैंकों के विलय के लिए फिलहाल कोई रोडमैप या योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने बताया कि बजट 2026-27 में जिस विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च-स्तरीय समिति का प्रस्ताव रखा गया है, वह इस विषय और अन्य पहलुओं पर गौर करेगी।