एनजीटी ने पूछा सिंगरौली-सीधी में एलिफेंट कॉरिडोर अब तक क्यों नहीं हुआ अधिसूचित

भोपाल। सिंगरौली-सीधी में एलिफेंट कॉरिडोर(हाथी गलियारा) की अधिसूचना अब तक जारी नहीं किए जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली की मुख्य पीठ ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और अदाणी ग्रुप को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

एनजीटी ने मई 2025 में अदाणी ग्रुप को हुए कोयला ब्लाक आवंटन की पर्यावरणीय स्वीकृति की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

22 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

केंद्र सरकार एवं नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड से भी जवाब मांगा है कि सीधी सिंगरौली में पूर्व के हाई कोर्ट एवं एनजीटी के पूर्व के आदेशों के बाद भी आज तक एलिफेंट कॉरिडोर क्यों नहीं अधिसूचित हुआ। एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति अफरोज अहमद की युगल पीठ ने पर्यावरणविद् अजय दुबे की याचिका पर यह नोटिस जारी करते हुए प्रकरण की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की हैं।

याचिका में कहा गया है कि अदाणी कोयला ब्लाक को सिंगरौली के अत्यंत घने जंगलों में 1500 हेक्टेयर भूमि कोयला माइनिंग के लिए आवंटित कर दी गई, जिसमें सभी नियमों को दरकिनार करते हुए पर्यावरणीय अनुमति भी दे दी गई।

1500 हेक्टेयर वन भूमि कोयला निकालने के लिए आवंटित की गई थी

इस याचिका में यह भी आधार लिया गया कि, जिस क्षेत्र में कोयला ब्लाक आवंटित किया गया है, उस क्षेत्र में पूर्व से वन विभाग की साइट सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ पड़ता है, जिसकी 10 किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का खनन संचालित करने की अनुमति नहीं प्रदान की जा सकती।

याचिकाकर्ता अजय दुबे की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि केंद्र शासन द्वारा सिंगरौली क्षेत्र में वर्ष 2022 में अदाणी ग्रुप की महान कोल एनर्जी एवं स्ट्रेटाटेक मिनरल्स को 1500 हेक्टेयर वन भूमि कोयले के उत्खनन के लिए आवंटित की गई थी।

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