भोपाल। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर रचना विज्ञान में नई कड़ी जोड़ी है।
संस्थान के विशेषज्ञों ने नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से, यानी नासाग्रसनी (नेजोफैरिंक्स) क्षेत्र में स्थित एक विशेष ग्रंथि की पहचान की है। इतना ही नहीं, इस ग्रंथि से संबंधित एक अज्ञात निकासी नलिका (डक्ट) को भी पहली बार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिका Journal of Anatomy में विशेषज्ञों की गहन समीक्षा के बाद प्रकाशित हुआ है, जिससे इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता और महत्व और अधिक बढ़ गया है।
सूक्ष्म अध्ययन से मिली नई पहचान
- शोध दल में प्रो. सुनीता अरविंद अठावले, प्रो. शीतल कोटगिरवार, प्रो. मनाल एम. खान, प्रो. अंशुल राय, प्रो. दीप्ति जोशी और प्रो. डॉ. रेखा लालवानी शामिल रहीं।
- टीम ने आधुनिक जांच तकनीकों, सूक्ष्म अवलोकन और विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से ग्रंथि की सटीक स्थिति, आकार, संरचना और आसपास के अंगों से उसके संबंध का गहन अध्ययन किया।
- इस ग्रंथि की स्वतंत्र इकाई के रूप में पहचान और उससे जुड़ी निकासी नलिका की पुष्टि को शोध की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज सिर और गर्दन की सर्जरी को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाने में मदद करेगी। कैंसर उपचार और रेडियोथेरेपी की योजना बनाते समय महत्वपूर्ण ऊतकों की पहचान अधिक स्पष्टता से की जा सकेगी। मेडिकल इमेजिंग में भी रोगों की पहचान की सटीकता बढ़ेगी।