रियाद: अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला किया गया है। वहीं सऊदी अरब के तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ है। ईरान की मिसाइलें लगातार खाड़ी देशों के आसमान में हैं। हालांकि कुछ मिसाइलों का असर जरूर हुआ है लेकिन ज्यादातर मिसाइलों को रोक दिया गया है। जैसे संयुक्त अरब अमीरात पर अभी तक 160 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं जिनमें से 4-5 मिसाइलें ही गिरी हैं। इसी तरह सऊदी भी ईरानी मिसाइलों के सीधे निशाने पर है। हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर सऊदी अरब के आसमान की रक्षा कौन कर रहा है?
सऊदी अरब का एयर डिफेंस ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए मल्टी-लेयर्ड डिफेंस नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। सऊदी अरब का डिफेंस बजट 78 अरब डॉलर का है और वो अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम और पैट्रियट इंटरसेप्टर, दक्षिण कोरिया का KM-SAM एयर डिफेंस सिस्टम और चीनी एंटी-ड्रोन लेजर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।
सऊदी अरब अपनी सेना को आधुनिक बनाने में भारी भरकम निवेश करता है। 2025 में उसने अपनी सेना पर 80 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इसका एक बड़ा हिस्सा रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स को मुश्किल हवाई खतरों के खिलाफ एक मजबूत, मल्टी-लेयर्ड शील्ड बनाने के लिए दिया गया। ईरान जब सऊदी अरब पर हमला कर रहा है तो ये डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो चुके हैं।