कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद इलेक्टोरल लिस्ट पर हंगामा मचा है। 28 फरवरी को प्रकाशित फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट में कई परिवारों को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। ऐसा न सिर्फ आम लोगों के साथ हुआ है, बल्कि इस लिस्ट में वर्ल्ड कप जीतने वाले क्रिकेटर, कैबिनेट मिनिस्टर, रिटायर्ड सैनिकों का परिवार भी शामिल है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एसआईआर के बाद 63 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए और 60 लाख से ज्यादा लोगों को ज्यूडिशियल जजमेंट के तहत रखा गया।
क्रिकेटर ऋचा घोष के साथ भी गड़बड़ी
ये गड़बड़ियां बड़े-बड़े नामों और जगहों से परे हैं। साल 2025 की महिला वर्ल्ड कप विनर ऋचा घोष के पिता मनबेंद्र घोष ने बताया कि उनका और उनकी पत्नी का नाम लिस्ट में है, लेकिन ऋचा और उनकी बहन सोमश्री के नाम पर फैसला नहीं हो रहा है। यह सवाल बंगाल की सीनियर मंत्री शशि पांजा ने भी उठाया है। उन्होंने कहा कि उनके घर के सभी सदस्य का नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन उनका नाम नहीं है।
फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट ने कई परिवारों को बांटा
- एसआईआर की फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट पब्लिश होने के बाद पश्चिम बंगाल में हंगामा हो गया।
- फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट ने बंगाल के कई परिवारों को बांट दिया है, जिसमें कई नामचीन लोग भी शामिल है।
- लोगों ने बताया कि चुनाव आयोग को सारे डॉक्यूमेंट्स दिखाने के बाद भी उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।
- इस गड़बड़ी का शिकार न सिर्फ आम लोग हुए, बल्कि क्रिकेटर, मंत्री, पूर्व सैनिक से लेकर कई लोगों ने अपने नाम वोटर लिस्ट से गायब पाया।
कोलकाता के लोग भी परेशान
फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट पब्लिश होने के बाद कोलकाता के लोगों ने भी ऐसी ही कहानियां बताईं। टॉलीगंज के सुदीप रॉय चौधरी ने कहा कि उन्होंने सुनवाई पास कर ली और डॉक्यूमेंट्स जमा कर दिए, लेकिन अभी भी फैसला चल रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को मंजूरी मिल गई, जबकि उनका नाम लिस्ट से अभी भी गायब है। जादवपुर के अरूप घोष ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी के साथ वोटर लिस्ट के लिए अप्लाई किया था, लेकिन सिर्फ उनकी बेटी को शामिल किया गया था।
रिटायर्ड सैनिक का नाम भी लिस्ट से हुआ गायब
ऐसी ही गड़बड़ी सियालदह में रहने वाले सौमिक भट्टाचार्य के साथ हुई है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के बताए सारे डॉक्यूमेंट्स दिखाने के बाद भी उनका नाम लिस्ट में नहीं आया, जबकि उनके परिवार का नाम लिस्ट में आ गया। वहीं, अमडांगा के रिटायर्ड सैनिक पार्थ घोष का नाम फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट में नहीं आया, जबकि उनके बेटे का नाम वोटर लिस्ट में था। पार्थ घोष पहले नायब सूबेदार थे और अब एस पी मुखर्जी पोर्ट पर काम कर रहे हैं। इस गड़बड़ी का असर वेस्ट मिदनापुर में यासीन पठान के परिवार तक भी पहुंचा है, जिनके कुछ सदस्यों का नाम लिस्ट में है और कुछ का नाम फ्लैग किया गया है।