बांग्लादेश-भारत के रिश्ते यूनुस की ‘छाया’ से निकल रहे, फिर बनेंगे पक्के दोस्त? बांग्‍लादेशी एक्सपर्ट ने बताया

ढाका: बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने लगातार भारत-विरोधी भावना का इजहार किया। इसका असर दोनों देशों के रिश्ते पर साफ देखा गया। यूनुस की अंतरिम सरकार के समय ढाका-दिल्ली के रिश्ते में जमी बर्फ के बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद पिघलने के उम्मीद की जा रही है। बांग्लादेश में बीते महीने तारिक रहमान के पीएम बनने के बाद से दोनों देशों में तीखी बयानबाजी बंद हुई है लेकिन रिश्ता सुधारने की ओर कोई बहुत बड़ा कदम अभी नहीं उठाया गया है।

लेखक और राजनीतिक विश्लेषक सालेहुद्दीन अहमद ने भारत और बांग्लादेश के रिश्ते के भविष्य पर बात की है। प्रथोमोलो में अपने लिख में अहमद ने कहा है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में ठहराव है, जिसमें दोनों सरकारों को आंतरिक रूप से स्थिरता बनाए रखने का अवसर है। दोनों देशों के बीच संबंधों की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए मुख्य रूप से तीन पैमानों पर गौर करना होगा ये तीन पैमाने- बॉर्डर, व्यापार और राजनीति व कूटनीति हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद

बांग्लादेश-भारत सीमा दुनिया की सबसे लंबी सीमाओं में से एक है। इसकी लंबाई 4,096 किलोमीटर (2,545 मील) है। बांग्लादेश-भारत के बीच बॉर्डर को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं है। सीमा पर कभी-कभी हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि ये अमूमन गैर-सैन्य प्रवृति की होती हैं। वर्तमान समय में बांग्लादेश-भारत सीमा काफी हद तक शांत है।

दोनों देशों के व्यापार अहम मुद्दा है क्योंकि जमीनी बॉर्डर से आसानी से आयात-निर्यात किया जा सकता है। बांग्लादेश-भारत में व्यापार लगातार बढ़ा है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से आयात लगभग हर क्षेत्र में बढ़ा है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से कुल आयात में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

राजनीति और कूटनीति

बॉर्डर पर शांति है और तनाव के बावजूद व्यापार बढ़ा है। ऐसे में बांग्लादेश-भारत संबंधों में सबसे बड़ी कमी राजनीति और कूटनीति के क्षेत्र में है। खासतौर से बांग्लादेश में 2024 के प्रदर्शनों और शेख हसीना के भारत में शरण लेने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शेख हसीना को शासन चलाने में मदद के लिए बांग्लादेश की आबादी का एक हिस्सा भारत को दोषी ठहराता है। भारत की ढाका में दखल से जुड़े ज्यादातर आरोप हवा-हवाई साबित हुए। इसके बावजूद एक वर्ग के मन में भारत विरोधी भावनाहै, जिसे दूर करना जरूरी है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य

सालेहुद्दीन कहते हैं, ‘दोनों देशों के संबंधों में मुख्य मुद्दा राजनीति और कूटनीति में निहित है। हाल में इस क्षेत्र में कुछ हलचल हुई है। एक बात साफ है कि दोनों पक्ष कुछ हद तक लचीले हो रहे हैं लेकिन बदलाव बहुत कम है। बांग्लादेश में चुनावों के माध्यम से राजनीतिक बदलाव हुआ है। तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री हैं और भारत से संबंधों को अहम मान रहे हैं।

बांग्लादेश-भारत के नेताओं ने कुछ पहल की हैं। बांग्लादेशियों के लिए भारतीय वीजा की बहाली होने जा रही है। बांग्लादेश सरकार ने भी दो महीने के निलंबन के बाद दिल्ली और अगरतला में अपने मिशनों से भारतीय नागरिकों को वीजा जारी करना शुरू किया है। कोलकाता और त्रिपुरा में बांग्लादेश के रास्ते सीमा-पार परिवहन सीमित पैमाने पर शुरू हो गया है।

उस्मान हादी के हत्यारोपी की गिरफ्तारी

भारत की पुलिस ने ‘इंकलाब मंच’ के संयोजक उस्मान हादी की हत्या के मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद और उसके साथी आलमगीर को गिरफ्तार किया है। ये दिखाता है कि भारत की ओर से अब बांग्लादेश की मदद की जा रही है। वहीं ढाका में सत्तारूढ़ बीएनपी भी भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की ओर इच्छुक है।

बीएनपी के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि शेख हसीना को शरण का मामला संबंधों में बाधा नहीं बनेगा। कह सकते हैं किदोनों देशों के रिश्ते में सुधार की रफ्तार धीमी जरूर है लेकिन दोनों सरकारें संबंधों के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए ईमानदारी से आगे बढ़ती हैं तो संबंधों में गर्माहट भी बढ़ेगी।

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