पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव वोटिंग के दौरान कांग्रेस के 2 विधायकों ने खबर लिखे जाने तक अपना वोट नहीं डाला था। अगर ये अंत तक गायब रहते हैं तो समीकरण पूरी तरह से बदल जाएगा। ऐसे में सिर्फ एक MLA का वोट पांचवे उम्मीदवार की हार-जीत तय कर देगा, लेकिन तब भी वोटों की एक और बार गिनती होगी। समझिए कैसे।
बिहार में 5वीं राज्यसभा सीट पर मामला फंसा
कांग्रेस के दो गायब विधायकों के वोट जोड़ कर भी महागठबंधन के पास राजद, कांग्रेस, लेफ्ट और AIMIM को मिलाकर 40 वोट ही पूरे होते हैं। यानी इस हालत में भी महागठबंधन उम्मीदवार राजद के अमरेंद्र धारी सिंह उर्फ एडी सिंह की जीत तय नहीं होगी। क्योंकि अगर कुल वोट को देखें तो महागठबंधन 40, NDA 38 और BSP के 1 विधायक को मिलाकर संख्या होती है 80 जो कि बहुमत से 1 वोट कम है।
कांग्रेस के 2 विधायकों के वोट न करने पर भी मामला फंसेगा
लेकिन कांग्रेस के दो विधायक अगर अंत तक वोट नहीं डालते हैं तो ये संख्या हो जाएगी 78। अब समझिए नया समीकरण। फिलहाल महागठबंधन के पास राजद के 25, कांग्रेस के 4, लेफ्ट के 4 और AIMIM के 5 विधायकों ने वोट डाले हैं। इसमें कांग्रेस के 2 विधायक अनुपस्थित हैं। ये संख्या हो जाती है 38, मतलब महागठबंधन के खाते में कुल जमा वोट हैं 38। वहीं हम अगर NDA को देखें तो उसके पास बीजेपी-जदयू के 10, लोजपा (रामविलास) के 19, HAM के 5 और RLM के 4 विधायक मिलाकर कुल वोट 38 ही हैं। यानि मुकाबला यहां बराबर का फंस रहा है।
कौन है वो एक विधायक जो हो गया अचानक से अहम
उधर जीतन राम मांझी की समधन और बहू की तेजस्वी यादव से मुलाकात ने अलग सियासी पारा चढ़ा दिया है। बावजूद इसके अगर क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो ऐसे में चैनपुर से बसपा के विधायक सतीश कुमार का वोट अहम हो गया है। बसपा विधायक का एक वोट NDA या महागठबंधन जिसके खाते में गया, वो एक वोट से ही आगे हो जाएगा यानि कुल 39 वोट। फिर भी बहुमत के लिए 40 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में BSP विधायक का वोट मिलने के बाद भी कोई एक पक्ष चुनाव नहीं जीत पाएगा। तब जाकर दूसरी वरीयता के वोट गिने जाएंगे और इसके बाद ही 5वीं सीट के उम्मीदवार की हार-जीत का फैसला होगा।