तेहरान: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के निकलने पर नरमी बरतने के संकेत दिए हैं। ईरानी विदेश मंत्री के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि उनका इरादा दुनिया की तेल सप्लाई बाधित करने की नहीं है लेकिन युद्ध में शामिल देशों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बघाई ने भारत के एक जहाज के इस समुद्री गलियारे से सुरक्षित गुजरने की जानकारी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर चल रही अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है।
इस्माइल बगाई ने सोमवार को एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि एक भारतीय जहाज आज भारत पहुंचा, जिसे जलडमरूमध्य से गुजरने की मंजूरी दी गई थी। उन्होंने कहा, ‘हम भारत के बहुत करीब हैं। भारतीयों और ईरानियों में बहुत सी बातें एक जैसी हैं। हम दिल्ली के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने और उन्हें जारी रखने को काफी ज्यादा अहमियत देते हैं।’
होर्मुज बंद होने में ईरान की गलती नहीं: बघाई
इस्माइल बघाई ने होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली गैस और तेल सप्लाई में रुकावट पर कहा, ‘दुर्भाग्य से पूरे क्षेत्र पर जो असुरक्षा थोपी गई है, उसका असर होर्मुज पर पड़ रहा है। इसमें ईरान की कोई गलती नहीं है। इसके जिम्मेदार वो देश हैं, जिन्होंने बातचीत के बीच में हमला करते हुए ईरान पर एक युद्ध थोप दिया है।’
होर्मुज को खोला नहीं जाएगा
बघाई ने साफतौर पर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में मदद करने वाले जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि बाकी देशों को यहां से रास्ता दिया जा सकता है। ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा संकट में है। भारत इससे सीधे प्रभावित है क्योंकि इसी रास्ते से भारत का ज्यादातर समुद्री व्यापार होता है।
इस्माइल बघाई ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का सेहत को लेकर चल रही अटकलों को पूरी तरह से खारिज किया है। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बता सकता हूं कि वे पूरी तरह से ठीक हैं। आपने हाल ही में उनका अपने लोगों को दिया गया संदेश सुना होगा। उम्मीद है कि बहुत जल्द वे जनता को एक और संदेश देंगे और ईरान की स्थिति को स्पष्ट करेंगे।
ईरान युद्ध के तीन हफ्ते
ईरान पर अमेरिका और इजरायल गठबंधन ने 28 फरवरी को हमले शुरू किए थे। इसके बाद शुरू हुए इस युद्ध को तीन हफ्ते होने जा रहे हैं। बघाई ने कहा है कि इजरायल-अमेरिका ने बिना किसी उकसावे के हमले किया। यह बिल्कुल साफ है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर युद्ध थोपा है। ईरान ने सिर्फ हमलों का जवाब दिया है, जो संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी है।