भोपाल, भोपाल की बाकी बची 82 शराब दुकानों के लिए आज, मंगलवार को टेंडर की प्रक्रिया होगी। 34 ग्रुप में बंटी इन दुकानों की रिजर्व प्राइज 1374 करोड़ रुपए से ज्यादा रखी गई है। 1 ग्रुप पहले ही 5 ठेके करीब 97 करोड़ रुपए में ले चुका है।
बता दें कि भोपाल में कुल 87 कम्पोजिट शराब दुकानें हैं। इस बार ठेकों को 4 की बजाय 35 ग्रुप में बांटा गया है। ताकि, छोटे और नए लाइसेंस कारोबारी भी ठेके ले सके। हालांकि, शुरुआत में दो बार टेंडर की प्रक्रिया हो चुकी है, लेकिन बड़े ग्रुपों की मोनोपाली की वजह से वे नहीं जा सके। इस बीच ग्रुप की संख्या फिर बढ़ाई गई और ये 29 की जगह 35 कर दिए गए।
रात तक साफ होगी तस्वीर 34 ग्रुप को 82 शराब दुकानें अलॉर्ट की जाएगी। इसके लिए सुबह 10 बजे से प्रक्रिया शुरू होकर देर शाम तक चलेगी। जिसमें टेंडर भरने के साथ उन्हें कमेटी के सामने खोलने तक की प्रक्रिया शामिल हैं। निर्धारित आरक्षित मूल्य 1374.86 करोड़ रुपए है।
टेंडर से पहले बैठक भी हुई टेंडर की प्रक्रिया से पहले सोमवार को सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय में उपायुक्त आबकारी संभागीय उड़नदस्ता भोपाल यशवंत बनौरा की अध्यक्षता और सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ की उपस्थिति में बैठक हुई। इसमें जिले के संभावित टेंडरदाता शामिल हुए। उनके साथ विचार-विमर्श किया गया और पुर्नगठित किए गए 34 ग्रुप के बारे में जानकारी दी गई।
इस बार 20% बढ़ी ठेके की कीमत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रुपए से ज्यादा में हुए थे, जो टारगेट से 11% यानी, 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 1432 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी गई है। बता दें कि वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर आरक्षित मूल्य तय किया है।
इसका असर अब समूहों की कीमतों पर दिखने लगा है। भोपाल में इस बार सबसे महंगा समूह पिपलानी का है। इसमें 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर हैं। 20 फीसदी आरक्षित मूल्य बढ़ने के बाद इस समूह की कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। इससे पहले वर्ष 2025-26 में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख से ज्यादा था।
इसी तरह बाग सेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख से ज्यादा हो गई है। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीति में किए गए बदलावों के आधार पर ही ई-टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन होगा। छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे व सरकार को फायदा मिलेगा। इससे नए लोगों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा।
239 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे विभाग की माने तो नई व्यवस्था से सरकार के खजाने में सीधे 238 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।