निगम की सेंट्रल वर्कशॉप से जब्त दस्तावेजों का परीक्षण शुरू

भोपाल, भोपाल नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने रविवार को छापेमारी के दौरान सेंट्रल वर्कशॉप से जब्त दस्तावेजों का परीक्षण शुरू कर दिया है। बीते चार साल में पास किए गए तमाम फर्जी बिलों की भी जांच की जाएगी।

यह भी देखा जाएगा कि ये बिल किस कर्मचारी से होते हुए किन अधिकारियों तक पहुंचे और इस फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका रही?। इसके बाद लोकायुक्त की टीम संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारी-कर्मचारियों को चिन्हित कर उनसे पूछताछ करेगी। बता दें कि शुक्रवार को टीम ने बड़ी कार्रवाई की थी।

इसी कार्रवाई के दौरान टीम को सेंट्रल वर्कशॉप, नगर निगम में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिले थे। इसके आधार पर रविवार सुबह करीब 9 बजे लोकायुक्त की टीम ने माता मंदिर के पास स्थित नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में छापा मारा।

यहां निगम की गाड़ियों से जुड़े मैकेनिकल काम होते हैं। निगम के फतेहगढ़ स्थित डाटा सेंटर से पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए करीब चार साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किया था। वहीं 11 मार्च को अपर आयुक्त के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

शिकायत के बाद एक्शन में आई लोकायुक्त टीम 

निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 11 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्ताजों के आधार पर धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई।

सॉफ्टवेयर से फर्जी बिल तैयार कराए

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार कराए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया।

गड़बड़ी: बिना काम कराए ई-बिल से भुगतान

आरोप हैं कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए। कई मामलों में वास्तव में काम हुआ ही नहीं, लेकिन सिस्टम में ई-बिल तैयार कर दिए गए। कुछ मामलों में जिस विभाग के नाम से बिल बनाए गए, उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं थी।

SAP सॉफ्टवेयर का डाटा जब्त किया 

प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया है। अब इसकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ भी था या नहीं।

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