रायगढ़, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में दो दिन में अफीम की अवैध खेती के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। दोनों ही मामले लैलूंगा ब्लॉक का है। प्रशासन ने दोनों मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में यह किसी संगठित गिरोह का काम नहीं लग रहा है, हालांकि जांच जारी है।
पहला मामला नवीन घटगांव का है यहां निवासी सादराम नाग (60) के खेत में सब्जियों के बीच अफीम की खेती मिली। पौधों में फूल आना शुरू हो गया था, कुछ डंठल सूख चुके थे। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की।
वहीं जांच के दौरान गांव के ही अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचते ही आरोपी सबूत नष्ट करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बता दें कि प्रदेश में पिछले 17 दिनों में अफीम की खेती पकड़ाने का यह पांचवां मामला है।
दूसरे मामले में भी अवशेष जब्त
सोमवार दोपहर लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में करीब 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल उगाने की जानकारी मिली। घर से पेड़, पत्तियां, तनों के सूखे अवशेष जब्त किए गए। जब्त नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
रिपोर्ट आने के बाद फसल के प्रकार की पुष्टि होगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ड्रोन से हो रही निगरानी
जिले में अवैध खेती रोकने के लिए ड्रोन सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। खरसिया के 14 गांव, घरघोड़ा के 10 गांव, तमनार के 12 गांव, लैलूंगा के 4 गांव, मुकडेगा के 3 गांव, रायगढ़ के 11 गांव, पुसौर के 13 गांव, धरमजयगढ़ के 7 गांव में सर्वे किया गया है। दुर्गम इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
छोटे रकबे में हो रही अवैध खेती
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से क्षेत्र में जांच की जा रही थी, जिसमें 4 दिनों के भीतर 3 मामले सामने आए हैं। सभी मामलों को देखकर ऐसा लगता है कि बड़े स्तर पर अफीम की खेती नहीं की जा रही थी।
अफीम की खेती पकड़ाने का पांचवां मामला
बता दें कि प्रदेश में पिछले 17 दिनों में अफीम की खेती पकड़ाने का यह पांचवां मामला है। इससे पहले 7 मार्च को दुर्ग में अफीम की खेती पकड़ाई थी। 10 मार्च को बलरामपुर के कुसमी में और 12 मार्च को बलरामपुर के कोरंधा में अफीम की खेती मिली थी। 21 मार्च को रायगढ़ के तमनार में अफीम की खेती पकड़ी गई थी।