नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की स्थिति टाइट हो गई है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज की खाड़ी से जहाजों का आवाजाही बंद है। दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल और एक तिहाई गैस होर्मुज की खाड़ी से होकर गुजरती है। इस खाड़ी से गुजरने वाला अधिकांश तेल और गैस एशिया को जाती है लेकिन इस संकट के कारण पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया है। कई देशों ने इस दौरान तेल और गैस की कीमतों में काफी बढ़ोतरी की है। इस बीच यूरोपीय देश स्लोवाकिया ने विदेशी ड्राइवरों के लिए डीजल महंगा कर दिया है।
स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको ने पोलैंड पर लोकल सप्लाई हड़पने का आरोप लगाते हुए यह घोषणा की है। असल में स्लोवाकिया और पोलैंड पड़ोसी देश हैं। पोलैंड में एक लीटर डीजल की कीमत 1.782 यूरो प्रति लीटर है, वहीं स्लोवाकिया में यह 1.528 यूरो प्रति लीटर है। यही वजह है कि सस्ते डीजल के चक्कर में बड़ी संख्या में पोलैंड को लेकर स्लोवाकिया के पेट्रोल पंपों से तेल भरवाते हैं। इसे फ्यूल टूरिज्म का नाम दिया गया है। इसके कारण उत्तरी स्लोवाकिया में स्थानीय लोगों के लिए पेट्रोल की शॉर्टेज हो गई है।
पड़ोसी देशों में कीमत
इसे देखते हुए स्लोवाकिया ने विदशों में रजिस्टर्ड गाड़ियों से ज्यादा चार्ज लेना शुरू कर दिया है। स्लोवाकिया की सीमा पोलैंड के अलावा चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया और हंगरी से लगती है। इन सभी देशों की तुलना में स्लोवाकिया में डीजल की कीमत कम है। चेक गणराज्य में एक लीटर डीजल की कीमत 1.741 यूरो, ऑस्ट्रिया में 1.954 यूरो और हंगरी में 1.638 यूरो है।कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसे इतिहास में ग्लोबल ऑयल सप्लाई के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान को शांति का संदेश भेजा था। इससे कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आई थी। लेकिन आज यह करीब 4 फीसदी तेजी के साथ 104 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।