चांदी ने उम्मीदों पर फेरा पानी, 54 दिनों में आधी भी नहीं बची कीमत

नई दिल्ली: पिछले साल एक समय ऐसा था कि चांदी सभी को चौंका रही थी। इसकी कीमत में रोजाना जबरदस्त तेजी आ रही थी। लेकिन यह अब निवेशकों को रुला रही है। इसकी कीमत में लगभग रोजाना गिरावट आ रही है। काफी निवेशकों ने इसे इस उम्मीद से खरीदा था कि इसमें तेजी इस साल भी जारी रहेगी। लेकिन जनवरी 2026 के बाद जो इसकी कीमत धड़ाम हुई है, उससे चांदी अभी तक संभल नहीं पाई है। स्थिति यह है कि यह अपने पीक से आधी भी नहीं बची है।साल 2025 में चांदी की कीमतों में 170 फीसदी तक उछाल आया था। यही नहीं, चांदी में यह तेजी जनवरी 2026 में भी जारी रही। जनवरी खत्म होने से कुछ पहले दिनों तक इसमें 70 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ गई थी। लेकिन उसके बाद चांदी की गाड़ी उल्टी घूमने लगी। इसमें चार दिनों में इतनी गिरावट आई कि निवेशकों के साथ एक्सपर्ट भी हैरान रह गए। इसमें अभी तक गिरावट बनी हुई है।

4 लाख से ऊपर पहुंच गई थी कीमत

इस साल जनवरी में चांदी में इस कदर तेजी थी कि यह देखते ही देखते ही देखते प्रति किलो 4 लाख रुपये से ऊपर निकल गई थी। 29 जनवरी को एमसीएक्स पर चांदी 4.39 लाख रुपये प्रति किलो पर थी। यह इसका अभी तक का ऑल टाइम हाई है।

अब चांदी में लगातार गिरावट आ रही है। मंगलवार को भी इसकी कीमत लुढ़क गई। दोपहर 12:30 बजे एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी 2,23,104 रुपये पर कारोबार कर रही थी। कारोबार के दौरान यह प्रति किलो 11,500 रुपये से ज्यादा गिर गई थी। इसकी कीमत 2,13,562 पर आ गई थी।

आधे से ज्यादा कीमत स्वाहा

चांदी अब अपने पीक से आधे से ज्यादा लुढ़क गई है। 29 जनवरी को यह अपने पीक यानी .39 लाख रुपये प्रति किलो पर थी। आज यह गिरकर 2,13,562 रुपये तक आ गई। यानी यह पीक के मुकाबले 51 फीसदी गिर गई है। कल यानी सोमवार को चांदी की कीमत 2 लाख रुपये से नीचे आ गई थी।

चांदी में गिरावट के 3 बड़े कारण

  • अमेरिकी डॉलर में इस समय तेजी बनी हुई है। वहीं अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने भी सख्ती दिखाई है। इस कारण निवेशकों का चांदी जैसी एसेट्स से आकर्षण कम हो गया है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता।
  • चांदी में हाल ही में जबरदस्त तेजी आई थी। इस कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इससे इसकी कीमत में और ज्यादा गिरावट आई। चूंकि मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है। इस कारण भी निवेशकों ने इसे बेचकर मुनाफा कमाना बेहतर समझा।
  • पिछले साल चांदी में तेजी कारण इसकी इंडस्ट्री में जबरदस्त डिमांड भी थी। लेकिन अब इसमें गिरावट आई है। दरअसल, वैश्विक उथल-पुथल के कारण चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड (मुख्य रूप से चीन और यूरोप) में कमी आई है। इससे भी चांदी की कीमत में गिरावट देखी जा रही है।

क्या खरीदारी का सही समय?

टाटा म्यूचुअल फंड ने एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मजबूत बुनियादी कारकों और बाजार की अनिश्चितताओं को देखते हुए हम चांदी में निवेश करने की सलाह दोहराते हैं।’ वहीं कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि वैश्विक तनाव कम होने से चांदी की मांग में फिर से तेजी आएगी। ऐसे में इसकी कीमत में आने वाले समय में तेजी देखी जा सकती है।

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