राजस्‍थान से सटे पाकिस्‍तान के सिंध की रेत के नीचे म‍िला अनमोल खजाना, निकाल लिया तो होगा मालामाल

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित थारपरकर को एक मुश्किल क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है। इसकी वजह यहां का रेतीला क्षेत्र है, लेकिन अब इसी थार की रेत के नीचे ऐसा खजाना छिपा है, जो पाकिस्तान की तकदीर बदल सकता है। गुजरात और राजस्थान से सटे पाकिस्तान के थार क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सिलिका युक्त रेत मौजूद है, जो औद्योगिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। खासतौर पर जब पाकिस्तान बड़ी मात्रा में कांच और उससे जुड़े उत्पात आयात करता है। ये चीजें निर्माण और पैकेजिंग के साथ ही रीन्यूएबल एनर्जी के लिए बहुत जरूरी है।

पाकिस्तान को होगी मोटी कमाई

हालांकि, यह इतना आसान नहीं है। इसके लिए पाकिस्तान को रेत की प्रोसेसिंग करनी होगी, जिसके लिए निवेश करना आर्थिक रूप से संकट में घिरे देश के लिए बड़ी मुश्किल है। विश्लेषक इसे साफ-साफ आर्थिक विफलता का उदाहरण बताते हैं। उनका कहना है कि कच्ची रेत से बहुत कम आमदनी होती है, जबकि प्रोसेस्ड कांच की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। व्यापारिक घाटे और बेरोजगारी का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए इस संसाधन का इस्तेमाल न कर पाना उसकी अक्षमता को दिखाता है।

विश्लेषक पाकिस्तान के लिए थार में परिस्थितियां अनुकूल बताते हैं। बहुत कम क्षेत्र ऐसे हैं, जहां ये सारे फायदे एक साथ मिलते हैं।
संसाधन- यहां सिलिका रेत की भरपूर मात्रा है।
ऊर्जा- मौजूदा कोयला ढांचा और सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल से ऊर्जा तक पहुंच भी आसान है।
पहुंच- कराची बंदरगाह के करीब होना इसे मध्य-पूर्व, अफ्रीका और मध्य एशिया के बाजारों में पहुंचने का रास्ता देता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट का कहना है कि थोड़े से निवेश से भी यहां काफी राजस्व की कमाई हो सकती है। इसकी शुरुआत व्यवहारिक और चरणबद्ध तरीके से हो सकती है, जिसके लिए मध्यम स्तर के कांच बनाने वाले कारखाने लगाए जा सकते हैं।

लेकिन कंगाल पाकिस्तान के लिए निवेश जुटाना सबसे मुश्किल काम होगा। खासतौर पर जब देश की अर्थव्यवस्था संकट से गुजर रही है और इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बेलआउट पैकेज की तरफ निहार रहा है। पिछले महीने पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने बताया था कि देश में गरीबी 11 साल के सबसे उच्चतम स्तर 29% पर पहुंच गई है, जबकि आय में असमानता 27 साल के उच्चतम सतर पर हैं। देश में 7 करोड़ से ज्यादा अति गरीबी में जी रहे हैं।
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