होर्मुज से टोल वसूलने के लिए ईरान ने तैयार किया कानून, भारत समेत दुनिया के जहाजों को चुकाने होंगे टैक्स!

तेहरान: ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रहा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और तस्नीम ने इसकी जानकारी दी है। अलजजीरा ने इन दोनों एजेंसियों के हवाले से बताया है कि ‘ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल शुल्क लगाने के लिए कानून तैयार कर रहा है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी संसद एक मसौदा कानून पारित करने की तैयारी में है जो अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की अनुमति देगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि होर्मुज से टोल वसूलने की पुष्टि संसद की नागरिक मामलों की समिति के अध्यक्ष ने की है। उन्होंने कहा है कि प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे विधायिका की कानूनी टीम की तरफ से अंतिम रूप दे दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कहा "इस योजना के तहत ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुल्क वसूलना होगा।"

होर्मुज से जहाजों के गुजरने पर शुल्क वसूलेगा ईरान

रिपोर्ट में ईरानी अधिकारी ने कहा है कि ‘इस योजना के तहत ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुल्क वसूलना होगा।’ अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है। लेरिन रिपोर्ट में उन्होंने आगे कहा कि ‘यह पूरी तरह से स्वाभाविक है। ठीक वैसे ही जैसे अन्य गलियारों में जब कोई सामान किसी देश से होकर गुजरता है तो शुल्क अदा किया जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य भी एक गलियारा है। हम इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और इसलिए जहाजों तथा टैंकरों की तरफ से इसका शुल्क अदा करना स्वाभाविक है।’आपको बता दें कि ग्लोबल शिपिंग पर नजर रखने वाली एजेंसियों का दावा है कि ईरान ने कुछ जहाजों से शुल्क के तौर पर 2 मिलियन डॉलर तक वसूले हैं। उनका कहना है कि ईरान ने होर्मुज से शुल्क वसूलकर करीब 75 अरब डॉलर जुटाने का प्लान तैयार किया है। होर्मुज ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए काफी महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है और करीब 20 प्रतिशत एनर्जी सप्लाई, जिसमें कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) शामिल है, उसकी सप्लाई होती है। होर्मुज ब्लॉक होने से पश्चिम एशिया के देशों जैसे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका पर इसका गंभीर असर पड़ा है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान के दोस्त देशों जैसे चीन, भारत, पाकिस्तान, इराक और रूस के जहाजों के लिए होर्मुज में कोई रूकावट नहीं है।

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