तमिलनाडु: NDA सीट शेयरिंग में ‘खेला’ कर गए पलानीस्वामी, अन्नामलाई के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस, जानें क्या हुआ?

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग हो चुकी हैं। इसमें बीजेपी को 2021 के मुकाबले अधिक सीटें लड़ने को मिली हैं लेकिन तमिलनाडु में एनडीए के सबसे बड़े घटक एआईएडीएमके ने बीजेपी को मनचाही सीटें नहीं दी हैं, बल्कि बीजेपी के खाते में कठिन सीटें गई हैं। इस सब के बीच चर्चा है कि तमिलनाडु के बीजेपी के सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय पूर्व स्टेट प्रेसीडेंट के. अन्नामलाई चुनाव लड़ने से इंकार कर सकते हैं, क्योंकि इससे पहले जब बीजेपी ने राज्य में बीजेपी नेताओं की ड्यूटी लगाई थी तो अन्नामलाई को कराईकुडी, श्रीवैकुंठम, विरुगंबक्कम, सिंगनल्लूर, मदुरै (दक्षिण) और पद्मनाभपुरम निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सीट शेयरिंग में एडापल्ली पलानीस्वामी की चली।

पलानीस्वामी AIADMK का प्लान

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सीट शेयरिंग में एडापड्डी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने अपनी शर्तें मनवाई। तमिलनाडु में AIADMK को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर ईपीएस ने सीटों के बंटवारे पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसी के चलते यहां तक ​​कि एक ऐसी सीट जिसे बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई के लिए एक संभावित सीट माना जा रहा था। बीजेपी को वह सीट भी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो उन्हें बीजेपी की कई मांगें भी ठुकरा दीं। बीजेपी ने तमिलनाडु के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रभारी नियुक्त किया है। राज्य में बीजेपी की कमान नैनार नागेंद्रन के हाथाें में है। एनडीए के अन्य प्रमुख नेताओं में ए. रामदास और दिनाकरण हैं।

24-25 मार्च को फाइनल हुए तमिलनाडु एनडीए सीट शेयरिंग के तहत एआईएडीएमके को राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से 169 सीटें मिली हैं, जबकि शेष 65 सीटें उसके सात एनडीए सहयोगियों को आवंटित की गई हैं। बीजेपी को 27 सीटें, पट्टाली मक्कल काची (PMK) को 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) को 11 सीटें दी गई हैं। बाकी सीटें छोटी पार्टियों जैसे तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), इंडिया जननायक काची (IJK), तमिलगा मक्कल मुनेत्र कझगम (TMMK) और पुराची भारतम के बीच बांटी गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एआईएमडीएके के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह बंटवारा एक ऐसी बातचीत को दिखाता है जिसमें पार्टी ने अपनी निर्णायक पकड़ बनाए रखी। भले ही यह गठबंधन बीजेपी नेतृत्व के दबाव में बना हुआ माना जाता हो।
अब क्या करेंगे अन्नामलाई?
सीट शेयरिंग में कोयंबटूर जिले की सिंगानल्लूर जैसी सीटों के लिए BJP के अनुरोध पर भी नहीं मिली हैं। यहां से अन्नामलाई ने 2024 के लोकसभा चुनावों में डीएमके उम्मीदवार से हारने के बावजूद अपनी ताकत दिखाई थी। कोयंबटूर की अन्य सीटों जैसे सुलूर और कवंडमपालयम के लिए किए गए अनुरोधों को एआईएडीएमके ने स्वीकार नहीं किया। चेन्नई में बीजेपी को कम से कम तीन सीटें चाहिए थीं, लेकिन उसे सिर्फ एक सीट, मायलापुर ही मिली। कोयंबटूर में उसे कोयंबटूर उत्तर सीट दी गई, जो इस क्षेत्र में कम से कम दो सीटों की उसकी उम्मीदों से कम थी। डेली थांथी ने एक रिपोर्ट में कहा कि तमिलनाडु भाजपा प्रमुख नैनार नागेंद्रन तिरुनेलवेली से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जबकि के अन्नामलाई और वनथी श्रीनिवासन को सिंगनल्लूर और कोयंबटूर उत्तर से खड़ा किया जाना था। विशेष रूप से, अन्नामलाई ने 2021 के विधानसभा चुनाव में करूर जिले के अरवाकुरिची से और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर से चुनाव लड़ा था। 2021 में डीएमके के आर. एलंगो ने उन्हें 24,816 वोटों के अंतर से हराया।
अन्नामलाई से उम्मीद की जा रही थी कि वे पूरे राज्य में एनडीए गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे। इस साल की शुरुआत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जवाब दिया था कि मैं कोई भी फैसला लेने से पहले नेतृत्व से बात करूंगा। तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने एक ही चरण में चुनाव रखा है। 23 अप्रैल को राज्य की सभी सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे मतों की गिनती 4 मई को होगी। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है। राज्य में 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। ऐसे में आने वाले एक हफ्ता तमिलनाडु की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
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