सरकार ने केरोसीन की बिक्री तो खोल दी लेकिन स्टोव कहां से लाएंगे? 400 वाला स्टोव 1700 में मिल रहा है

नई दिल्ली: केरोसिन स्टोव (Kerosine Stove) एक जमाने में भारतीय घरों की पहचान होता था। मिट्टी के तेल से स्टोव में खाना पकाया जाता था। अब फिर से केरोसिन स्टोव की जरूरत और याद आने लगी है। LPG रसोई गैस किल्लत के बीच सरकार ने केरोसीन (मिट्टी के तेल) की बिक्री के नियमों में ढील दी है। कोशिश है कि नागरिकों को तेजी और आसानी से केरोसीन मिल जाए, ताकि खाना पकाने में गैस की निर्भरता कम हो। लेकिन बाजार में आपको केरोसीन का स्टोव ढूंढे नहीं मिलेगा। यही हालत केरोसीन से जलने वाले लालटेन की है।

बाजार से गायब हैं

आप इस समय दिल्ली के थोक बाजार कहलाने वाले सदर बाजार में जाएं तो आपको केरोसीन का स्टोव ढूंढे नहीं मिलेगा। सरकार ने भले ही केरोसिन की उपलब्धता सुनिश्चित की है, लेकिन ग्राहक स्टोव लाएंगे कहां से? कंफेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स असोसिएशन के महामंत्री देवराज बावेजा का कहना है कि अब सदर बाजार में केरोसिन स्टोव के गिने चुने विक्रेता बचे हैं। किसी समय यहां केरोसीन स्टोव और लालटेन के ढेर सारे विक्रेता और निर्माता होते थे। वक्त के साथ रसोई गैस का चलन और उपलब्धता बढ़ी, तो केरोसिन स्टॉव का उपयोग घटता गया। लालटेन की जगह सोलर लाइट्स, बैटरी लाइट्स और इन्वर्टर ने ले ली।

स्टोव का दाम 1,700

वह बताते हैं कि अब वैश्विक युद्ध परिस्थितियों के बीच रसोई गैस की किल्लत महसूस हो रही है, तो मार्केट से स्टोव और डीजल भट्टी गायब हो गई हैं। हालत ये हो गई है कि दूसरे राज्यों से मंगाए गए स्टोव महंगे में बिक रहे हैं। तभी तो 400 रुपये का स्टोव का दाम 1,700 रुपये और 8-9 हजार की डीजल भट्टी का दाम 30 हजार रुपये तक हो गया है। सदर बाजार की गली लल्लू मिश्रा, कुतुब रोड और गांधी मार्केट में केरोसीन स्टोव और लालटेन के कारोबारी अब गिनती के बचे हैं। बहुत से ट्रेडर्स केरोसिन स्टोव का बिजनेस छोड़कर LPG बर्नर के व्यापार में शिफ्ट हो गए। अब किसी के पास स्टोव नहीं हैं। स्टोव का कबाड़ा तक बिक गया है।

केरोसिन स्टोव कई तरह के

बाजार में पहले कई तरह के केरोसिन स्टोव आते थे। लोहे का स्टोव, पीतल स्टोव, बत्ती वाला स्टोव (विक स्टोव) आदि। लोहे का स्टोव ज्यादा मजबूत और किफायती माना जाता है। पीतल का स्टोव बेहतर तो था, लेकिन महंगा पड़ता था। दिल्ली में बहुत से व्यापारी देश के अलग-अलग हिस्से से कच्चा और खुला माल मंगवाकर स्टोव तैयार करते थे। लुधियाना से बर्नर, राजकोट से पंप का वॉल्व आता था। उल्हास नगर से भी काफी माल आता था। अन्य राज्यों में भी स्थानीय स्टोव निर्माता हैं, जो लोकल मार्केट और उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करते हैं।

मजदूर शिफ्ट हो गए स्टोव पर

देवराज बावेजा ने बताया कि आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग की जरूरत केरोसीन स्टोव है। अब गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा, तो मजदूर वर्ग ने स्टोव पर खाना पकाना शुरू किया है। गैस की किल्लत के शुरुआती दिनों में बाजार का स्टॉक बिक गया। अब व्यापारियों को फैक्ट्रियों से तैयार स्टोव और कच्चा माल नहीं मिल रहा है। सभी ने दाम बढ़ा दिए हैं।

केरोसिन स्टोव के फायदे

  • गैस पर निर्भरता कम : LPG की कमी में यह अच्छा विकल्प
  • सस्ता ईंधन : कई जगह गैस से सस्ता पड़ता है केरोसिन
  • ग्रामीण और आपातकालीन उपयोग : बिजली या गैस न होने पर भी उपयोगी
  • पोर्टेबल : कहीं भी ले जाया जा सकता है

केरोसिन स्टोव के नुकसान

  • धुआं और प्रदूषण : स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
  • गंध : खाना बनाते समय तेज गंध
  • खतरा : आग लगने या विस्फोट का जोखिम
  • रख-रखाव : बार-बार सफाई और मरम्मत की जरूरत

कई गुना बढ़े केरोसिन-डीजल भट्टियों के दाम

सदर बाजार में कुतुब रोड के कारोबारी बलविंदर सिंह सरना ने बताया "घरेलू उपयोग में स्टोव चलते हैं। वहीं, बड़े काम में केरोसिन-डीजल भट्टियां चलती हैं। इनके दाम में भी कई गुना तेजी आई है। गैस किल्लत से पहले 8 से 9 हजार में भट्टियां मिल जाती थीं। अब 30 हजार रुपये तक रेट चला गया है। इनका इस्तेमाल बड़े भोज कार्यक्रमों में हलवाई, मिठाई विक्रेता, होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट्स ऑपरेटर्स कर रहे हैं। ये भट्टियां डीजल और मिट्टी के तेल दोनों से चल सकती हैं। ये शोर करती हैं। बर्तन भी काले हो जाते हैं। सरकार ने इंडस्ट्रियल डीजल पर 22 रुपये लीटर बढ़ाए हैं, तो इसकी कॉस्टिंग भी महंगी हुई है।"

केरोसीन का दाम कितना

केंद्र सरकार ने घरों तक केरोसिन पहुंचाने में आसानी के लिए पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में ढील दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाना पकाने और रोशनी के लिए पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत बेहतर केरोसिन तेल (SKO) के एड-हॉक आवंटन की अनुमति दे दी है। ये ढील तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। 60 दिनों तक या अगले आदेश आने तक (जो भी पहले हो) वैध रहेंगी। दिल्ली में इस समय बिना सब्सिडी वाले केरोसीन की कीमत 87.49 रुपये प्रति लीटर है।

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