भोपाल। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों को वरिष्ठों ने सदन और बाहर संवाद, व्यवहार और कार्यशैली के गुर बताए। विधानसभा के परिषद हाल में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र छह) की ओर से सोमवार को प्रारंभ हुए दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन राज्यों के 45 वर्ष आयु तक के युवा विधायकों को अपने स्वास्थ्य की चिंता करने की सलाह दी। कहा कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखकर ही जनता की सेवा की जा सकेगी। बोले- मैं प्रतिदिन दो घंटे व्यायाम करता हूं। सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 37 और राजस्थान व छत्तीसगढ़ के 13-13 विधायक शामिल हुए हैं।
राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक: डॉ. मोहन यादव
उनको संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही राजनीति में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
विकास कार्यों के लिए दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और काम करना चाहिए। हमारे यहां सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि, पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है।
परिवारवाद पर मुख्यमंत्री ने किया कटाक्ष
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने परिवारवाद की राजनीति पर कटाक्ष किया। युवा विधायकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य ने गणतंत्र की स्थापना की। इतना बड़ा साम्राज्य बनाया लेकिन बच्चों को राजा नहीं बनाया। यह हमारे लिए उदाहरण है। द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण इतने सामर्थशाली थे। उनका नाती-पोतों से भरा-पूरा बड़ा परिवार था, पर बच्चों को राजा नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ने हमें मौका दिया है, अगर बच्चों में दम होगा, तो वह स्वयं बन जाएंगे। उनको जबरदस्ती आगे बढ़ाने से कई बार हमारी राजनीति भी खराब हो जाती है।
संसदीय परंपराओं और नियमों का अध्ययन करें: नरेंद्र सिंह तोमर
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक कुरीतियों- जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
युवा विधायक संसदीय परंपराओं, नियमों-प्रक्रियाओं का अध्ययन करें और सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा में पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं।
विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें: वासुदेव देवनानी
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता से विकास में योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए। विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।
सफलता के लिए जनता से जुड़ाव जरूरी: कैलाश विजयवर्गीय एवं उमंग सिंघार
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधायक का कार्यालय बहुत सक्रिय होना चाहिए। आप हर व्यक्ति की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता है, लेकिन सबकी बात सुननी चाहिए। सदन केवल हंगामा करने के लिए नहीं है। छपास के चक्कर में न रहें। एक बार छवि बन जाती है तो न चाहकर भी संगठन को टिकट देना पड़ता है। छवि ऐसी बने कि संगठन भी सोचे कि टिकट काटा तो कहीं ऐसा न हो कि दो-तीन सीटें और प्रभावित हो जाएं।