नई दिल्ली: जनवरी के अंत में सोने की कीमत ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई थी लेकिन फरवरी में इसमें कुछ नरमी आई। इसका फायदा उठाते हुए दुनिया के कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने जमकर सोने की खरीदारी की। जनवरी में उन्होंने केवल 6 टन सोना खरीदा था जबकि फरवरी में उन्होंने 27 टन सोने की नेट खरीदारी की। यह लगातार 23वां महीना है जब सेंट्रल बैंक सोने के नेट खरीदार रहे। हालांकि इस दौरान तुर्की और रूस ने अपने भंडार से सोने की बिक्री की।
वर्ल्ड बैंक काउंसिल के मुताबिक फरवरी में यूरोपीय देश पोलैंड ने सबसे ज्यादा 20 टन सोना खरीदा। करीब एक साल में उसकी यह सबसे बड़ी मासिक खरीद है। पिछले साल फरवरी में पोलैंड ने 29 टन सोना खरीदा था। करीब 3.7 करोड़ की आबादी वाले इस देश का गोल्ड रिजर्व 570 टन पहुंच गया है जो उसके कुल रिजर्व का 31 फीसदी है। पोलैंड के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने 700 टन का टारगेट रखा है। भारत का गोल्ड रिजर्व करीब 880 टन है जो कुल रिजर्व का 15.17 फीसदी है।
किस-किस ने खरीदा सोना?
पोलैंड के अलावा उजबेकिस्तान और कजाकस्तान ने फरवरी में 8-8 टन सोना खरीदा। चेक गणराज्य और मलेशिया ने 2-2 टन और चीन तथा कंबोडिया के सेंट्रल बैंकों ने 1-1 टन सोना खरीदा। उजबेकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने लगातार पांचवें महीने खरीदारी की। इसके साथ ही उसका गोल्ड रिजर्व 407 टन पहुंच गया है जो उसके कुल रिजर्व का 88 फीसदी है। चेक गणराज्य ने लगातार 36वें महीने अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाया है। इस यूरोपीय देश का सोने का भंडार अब 75 टन पहुंच चुका है जो उसके कुल रिजर्व का 7 फीसदी है।
किसने की सोने की बिक्री?
चीन ने लगातार 16वें महीने सोने खरीदा है। इसके साथ ही उसका गोल्ड रिजर्व 2,308 टन पहुंच चुका है जो उसके टोटल रिजर्व का 10 फीसदी है। इस बीच तुर्की और रूस ने फरवरी में सोने की बिक्री की। तुर्की ने 8 टन और रूस ने 6 टन सोना बेचा। तुर्की ने ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद 20 अरब डॉलर का सोना बेचा है या उस पर लोन लिया है। तुर्की के सेंट्रल बैंक ने इस दौरान 52 टन सोना बेचा है। साथ ही 79 टन गोल्ड पर लोन लिया है। लीरा की गिरावट को थामने के लिए तुर्की को ऐसा करना पड़ा है।