नई दिल्ली: सोना-चांदी की कीमतों में सोमवार को सुबह-सुबह बड़ी गिरावट आई। एमसीएक्स पर जहां जून डिलीवरी वाला सोना बाजार खुलते ही प्रति 10 ग्राम 1100 रुपये से ज्यादा गिर गया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी में प्रति किलो 6000 रुपये से ज्यादा गिरावट आई। हालांकि बाद में बाजार कुछ संभलता हुआ भी दिखाई दिया।
सोमवार सुबह 9:30 बजे सोना 750 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 1,51,900 रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहीं 4700 रुपये से ज्यादा गिरकर 2,38,486 रुपये पर थी। शुरुआती कारोबार के दौरान सोना 1,51,457 रुपये तक और चांदी 2,37,190 रुपये तक गिर गई थी। सोना-चांदी में यह गिरावट अमेरिका-ईरान वार्ता के फेल होने के कारण आई है। इससे बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
कैसा रहा बीता हफ्ता?
राजधानी के सराफा बाजार में बीता हफ्ता सोने और चांदी के लिए अच्छा रहा। दोनों कीमती धातुओं में तेजी दर्ज की गई। चांदी 10,000 रुपये यानी 4.2 फीसदी बढ़ी। वहीं, सोना 3,800 रुपये यानी 2.51 फीसदी चढ़ा। युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और डॉलर में कमजोर रुख के बीच ऐसा हुआ। विदेशी बाजारों में मजबूत रुझानों का भी घरेलू बाजार की कारोबारी धारणा पर असर पड़ा।
सराफा बाजार में क्या भाव?
अखिल भारतीय सराफा संघ के अनुसार, शुक्रवार बाजार बंद होने तक दिल्ली में चांदी की कीमत 3,800 रुपये यानी 1.6 फीसदी बढ़कर 2,47,000 रुपये प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) हो गई। गुरुवार को इसमें गिरावट आई थी। यह 2,43,200 रुपये प्रति किलो रही थी। वहीं, 24-कैरेट वाला सोना भी 400 रुपये बढ़कर 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में सोने की कीमत 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रही थी।
सोने-चांदी पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
ऑगमोंट में शोध प्रमुख, रेनिशा चैनानी ने कहा, ‘ईरान संघर्ष पर सतर्क रुख और केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी से सराफा कीमतों में रिकवरी हुई।’ वहीं इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा, ‘अमेरिका-ईरान युद्धविराम से बीते हफ्ते तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई। महंगाई और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की चिंता कम होने से सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस से ऊपर स्थिर रहा और लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त की राह पर बना रहा।’ उन्होंने कहा कि संकट के दौरान सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति बनकर उभरे डॉलर के नरम होने से धारणा मजबूत हुई।
सोने-चांदी की चाल तय करेंगे ये फैक्टर
नए डेटा से पता चला है कि मार्च में अमेरिका में कंज्यूमर कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यह बढ़ोतरी तेल की ऊंची कीमतों और टैरिफ के असर की वजह से हुई। महंगाई अभी भी ऊंची बनी हुई है। इससे सेंट्रल बैंकों की ब्याज दरें घटाने की क्षमता सीमित हो जाती है।
सोने को अक्सर महंगाई और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव का जरिया माना जाता है। हालांकि, ऊंची ब्याज दरें सोने की मांग को कम कर देती हैं, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक सोने की तुलना ब्याज देने वाली संपत्तियों से करते हैं।
भारत और चीन में मांग के रुझान
चीन में सोने के प्रीमियम कम हो गए। इससे पता चलता है कि मांग तो स्थिर है। लेकिन, खरीदारों में खरीदारी की उतनी जल्दबाजी नहीं है। भारत और चीन की मांग वैश्विक सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। मांग के ये क्षेत्रीय रुझान सोने और चांदी की कीमतों के अनुमान को प्रभावित करेंगे। बाजार में अनिश्चितता के दौर में भी मजबूत मांग कीमतों को सहारा दे सकती है।