भोपाल। मध्य प्रदेश के बाघों की मांग देश के कई राज्यों में है। गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने मप्र से बाघ मांगे हैं। इसके लिए आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मप्र सरकार को पत्र लिखा है। आंध्र प्रदेश के पापीकोंडा नेशनल पार्क के लिए मप्र के कान्हा, सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ और गौर (बाइसन) मांगे हैं। राज्य सरकार ने गुजरात और राजस्थान को बाघ दे दिए हैं।
बाकी राज्यों में बाघ देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही अब आंध्र प्रदेश राज्य को बाघ देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से भी अभिमत लिया जाएगा। बाघ देने से पहले एनटीसीए उन राज्यों का दौरा करता है जहां बाघ दिए जाने हैं। एनटीसीए की स्वीकृति के बाद ही बाघ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है
आंध्र प्रदेश ने राज्य ने मप्र के वन विभाग से यह भी आग्रह किया है कि वे आंध्र में आकर देखे कि बाघों व गौर के अनुकूल राज्य का कौन सा क्षेत्र होगा, जहां इन्हें बसाया जा सकता है। इस पर मप्र ने वहां के पर्यावरण और अनुकूलता को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट अनुकूल होने और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अनुमति मिलने के बाद बाघ भेजे जा सकेंगे।
तेलंगाना और झारखंड को भी बाघ देने की तैयारी
प्रदेश सरकार आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना और झारखंड को भी बाघ देने की तैयारी कर रही है। इन राज्यों ने भी मप्र से बाघों की मांगे है। बाघ गणना 2022 के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ी है।
झारखंड ने तीन बाघ (दो मादा और एक नर के साथ-साथ 50 बायसन, 50 सांभर और हिरण मांगे हैं, जिन्हें पलामू टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा। इस प्रस्ताव को एनटीसीए की मंजूरी के लिए भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद दोनों राज्यों के बीच एमओयू किया जाएगा। इसके अलावा मप्र से बाघ लाकर तेलंगाना के कवाल टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा।