प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 से साकार हो रहा पक्के घर का सपना

कोरबा। कभी टपकती छत के नीचे बीतती रातें, हर बारिश के साथ बढ़ती चिंता, और बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर पल का डर३ ऐसे ही अनगिनत संघर्षों के बीच एक पक्के घर का सपना कई परिवारों के लिए केवल एक अधूरी चाह बनकर रह जाता था। लेकिन अब वही सपना साकार हो रहा है। सरकार की संवेदनशील सोच और जनकल्याणकारी प्रयासों ने उन उम्मीदों को नया आसमान दिया है, जिनके पास कभी अपना आशियाना नहीं था। अब केवल घर नहीं बन रहे, बल्कि सुरक्षित भविष्य, सम्मान और आत्मविश्वास की नींव भी रखी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना ने न केवल लोगों को छत दी है, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत कोरबा जिले के आरामशीन बुधवारी क्षेत्र में निवासरत पिंटू साहू के परिवार का वर्षों पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है। उनकी पत्नी कंचन साहू के नाम से आवास स्वीकृत हुआ है।

 साहू ने बताया कि उन्हें योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन किया, जिसके बाद महज एक माह के भीतर उनका आवास स्वीकृत हो गया और उन्हें प्रथम किस्त के रूप में 63 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस राशि से उन्होंने अपने नए घर का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहा था। बारिश के दिनों में घर में पानी टपकना, पानी भरना और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। सीमित आय में जीवन यापन करते हुए इन समस्याओं से जूझना उनके लिए बेहद कठिन था।

साहू ने बताया कि उनके पति सब्जी विक्रय का कार्य करते हैं और परिवार में दो बच्चे हैं। कच्चे घर में रहने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। अब पक्के आवास के निर्माण से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलेगा। बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा तथा मौसम की मार से भी राहत मिलेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिला होता, तो वे आज भी उन्हीं कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर होते।

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