इस्लामपुरा बना कृष्ण नगर, बाबरी चौक अब जैन मंदिर चौक, पाकिस्तान ने लाहौर की सड़कों और मोहल्लों के क्यों बदले नाम?

इस्लामाबाद: लाहौर का इस्लामपुरा अब कृष्ण नगर बन गया है। बाबरी मस्जिद चौक फिर से जैन मंदिर चौक तो सुन्नत नगर का नाम संत नगर हो गया है। मुस्तफाबाद अब धरमपुरा के नाम से जाना जाएगा। ये पढ़कर आप जरूर चौंक गए होंगे, लेकिन ये हकीकत है। बंटवारे के आठ दशक बाद पाकिस्तान के लाहौर शहर में सड़कों, गलियों और मोहल्लों के नाम बदले जा रहे हैं और उन्हें उनके पहले के नाम पर किया जा रहा है।

1947 में बंटवारे के बाद पंजाब का दिल कहा जाने वाला लाहौर शहर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था। वर्तमान में यह पाकिस्तान के पंजाब राज्य की राजधानी है। लगभग 8 दशक के पाकिस्तान के शासन में इस शहर के अंदर प्रमुख जगहों के नाम पर बदल दिए गए थे। ये पूरी विरासत को बदलने जैसा था। उनके नामों को इस्लामिक, पाकिस्तानी या स्थानीय हस्तियों के नाम पर कर दिया गया था।

लाहौर को वापस मिलेगी विरासत

अब पाकिस्तान की पंजाब सरकार लाहौर की बंटवारे से पहले की विरासत को लाने का प्रयास कर रही है, जो दशकों के दौरान धीरे-धीरे मिट गई थी। नाम बदलने का यह कदम पंजाब की मरियम नवाज सरकार की उसी कोशिश का हिस्सा है। समाचार एजेंसी PTI ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लाहौर की कई सड़कों और गलियों के आजादी से पहले के नाम को बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है।

पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में लाहौर और उसके आसपास के इलाकों की विभिन्न सड़कों और गलियों के मूल और ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की योजना को मंजूरी दी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए लिया गया है।

नवाज शरीफ की पहल पर बदले जा रहे नाम

उन्होंने बताया कि इस पहल का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना के प्रमुख भी हैं। उनके प्रस्ताव को पिछले सप्ताह कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी।

लाहौर की बदल दी गई थी पहचान

लाहौर की ऐतिहासिक गलियों और सड़कों का नाम पिछली सरकारों द्वारा बदल दिया गया था, जिनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पबेल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड शामिल हैं।

विभाजन से पहले की पहचान होगी बहाल

शरीफ ने मिंटो पार्क (ग्रेटर इकबाल पार्क) में तीन क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक ‘अखाड़ा’ (कुश्ती अखाड़ा) के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव रखा है, जिसे व्यापक रूप से नुकसान की भरपाई की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

उनके भाई प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को 2015 में पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शहरी विकास कार्यक्रम के तहत तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों, क्रिकेट क्लबों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों और एक कुश्ती अखाड़े को ध्वस्त करने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे कई क्रिकेटरों ने मिंटो पार्क के इन क्रिकेट क्लबों में प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

विभाजन से पहले भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी इन क्लबों में प्रशिक्षण लेने जाते थे। जब अमरनाथ 1978 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ लाहौर गए, तो वह मिंटो पार्क गए और ‘क्रिसेंट क्रिकेट क्लब’ के खिलाड़ियों के साथ समय बिताया। वह देश के विभाजन तक इसी क्लब से खेलते थे। मिंटो पार्क में ध्वस्त हो चुके कुश्ती के अखाड़े में कभी गूंगा पहलवान, इमाम बख्श और गामा पहलवान जैसे दिग्गज पहलवानों के मुकाबले होते थे। विभाजन से पहले हिंदू मिंटो पार्क में दशहरा का त्योहार मनाते थे।
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