स्मार्ट सिटी की नई पहल: बिना टेंडर सरकारी दफ्तरों को मिलेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, भोपाल में बनेंगे 80 चार्जिंग स्टेशन

 भोपाल। राजधानी भोपाल के सरकारी दफ्तरों में अब डीजल और पेट्रोल की गाड़ियां गुजरे जमाने की बात होने जा रही हैं। प्रदूषण कम करने और सरकारी परिवहन को हाईटेक बनाने के लिए भोपाल स्मार्ट सिटी एक बड़ा नवाचार करने जा रहा है।

‘मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति’ के तहत स्मार्ट सिटी खुद ‘ईवी एग्रीगेटर’ (वाहन प्रदाता) की भूमिका निभाएगा और करीब 2500 इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का एक सेंट्रलाइज्ड बेड़ा (केंद्रीकृत फ्लीट) तैयार करेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी विभागों को अब नई गाड़ियां खरीदने या किराए पर लेने के लिए लंबी टेंडर प्रक्रिया और कागजी औपचारिकताओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग सीधे अपनी जरूरत के मुताबिक स्मार्ट सिटी से संपर्क करेंगे और उन्हें तय दरों पर लीज मॉडल पर चमचमाती इलेक्ट्रिक गाड़ियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

‘मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति’

विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार सीधे स्मार्ट सिटी को मांग भेज सकेंगे और तय दरों पर उन्हें वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल प्रदेश सरकार की ‘मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति’ के तहत लागू की जा रही है।

स्थापित होंगे ईवी चार्जिंग स्टेशन

स्मार्ट सिटी और भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) मिलकर शहर में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेंगे। योजना के तहत शहर के प्रमुख प्रशासनिक और व्यावसायिक क्षेत्रों सहित लगभग 70 से 80 स्थानों पर आधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

वाहन खरीदने की जटिल प्रक्रिया से मिलेगी राहत

स्मार्ट सिटी प्रशासन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में किसी विभाग को इलेक्ट्रिक वाहन लेने के लिए लंबी टेंडर प्रक्रिया, रेट कॉन्ट्रैक्ट और विभिन्न प्रशासनिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। कम वाहनों के टेंडर होने से निजी ऑपरेटर भी रुचि नहीं दिखाते।

नई व्यवस्था में स्मार्ट सिटी निजी कंपनियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों से अनुबंध करेगा और जरूरत पड़ने पर विभागों को सीधे वाहन उपलब्ध कराएगा।

गौरतलब है कि भोपाल स्मार्ट सिटी पिछले पांच वर्षों से अपने परिवहन में करीब 90 प्रतिशत तक ई-वाहनों का उपयोग कर रहा है।

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