तंबाकू निषेध दिवस विशेष:गुटखा बैन सबसे बड़ा धोखा… क्योंकि, 14 साल में सिर्फ पैकिंग बदली

भोपाल, मप्र में ‘मसाला गुटखा’ (यानी तंबाकूयुक्त पान मसाला) पर प्रतिबंध लगे 14 साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों के बिल्कुल उलट है। 1 अप्रैल 2012 में जब सरकार ने गुटखे पर पूरी तरह रोक लगाई थी, तब तर्क दिया गया कि तंबाकू व सुपारी के जानलेवा गठजोड़ को रोककर ओरल कैंसर (मुंह के कैंसर) के मामलों में कमी लाई जाएगी। लेकिन, इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि इस पाबंदी से कैंसर के मरीजों में कोई कमी नहीं आई। बस गुटखा कंपनियों ने इसे बेचने का तरीका बदल लिया।

इस प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने पान मसाला और तंबाकू, दोनों को एक पैक की बजाय दो अलग-अलग पैक में बेचना शुरू कर दिया। भोपाल के जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि प्रतिबंध के बावजूद ओरल कैंसर के मरीजों में 42.37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे ओरल कैंसर मरीजों की वार्षिक स्थिति दर्शाती है कि प्रतिबंध का जमीनी असर शून्य रहा है। वर्ष 2012 में प्रतिबंध लागू होने के बाद किसी भी वर्ष मरीजों की संख्या में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं हुई।

ट्विन पाउच फॉर्मूला... ‘खाद्य पदार्थ’ में तंबाकू या निकोटीन मिलाना प्रतिबंधित, इसलिए दो अलग-अलग पाउच का कॉम्बो

देखिए किस तरह सिर्फ एक छलावा बनकर रह गया गुटखा बैन…

कागजी प्रतिबंध 2012 में गुटखा बैन किया गया, लेकिन बाजार ने तंबाकू व सुपारी को अलग-अलग दो पाउच में बेचने का रास्ता निकाल लिया।

खतरनाक कॉम्बिनेशन उपभोक्ता आज भी दोनों पाउच को खरीदकर हथेली पर मिलाते हैं, जिससे मुंह में जाने वाला घातक मिश्रण जरा भी न बदला।

अस्पताल के आंकड़े भोपाल के जवाहरलाल कैंसर अस्पताल में ओरल कैंसर के मरीज घटने के बजाय 14 साल से लगभग लगातार बढ़ रहे हैं।

पैकिंग बदली, जहर वही…गुटखा निर्माताओं ने कानून की खामियों का फायदा उठाया

बैन के बाद गुटखा निर्माताओं ने कानून की कमियों का फायदा उठाया। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों के तहत खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटीन मिलाना प्रतिबंधित है। कंपनियों ने सिंगल प्री-मिक्स पाउच की जगह ट्विन-पाउच व्यवस्था शुरू कर दी। कानूनी तौर पर ये दो अलग उत्पाद हैं, इसलिए ये बैन की श्रेणी से बाहर हैं। दोनों पैकेटों को मिलाकर खाया जा रहा है। अंतिम उत्पाद में कोई बदलाव नहीं आया।

  • तंबाकू और निकोटीन: 2012 से पहले यह पाउच के अंदर पहले से मिश्रित था; अब शुद्ध रूप से अलग पाउच में।
  • सुपारी, चूना और कत्था: पहले भी मौजूद थे; वर्तमान में भी दूसरे पाउच में जस के तस मौजूद हैं।
  • फ्लेवरिंग एजेंट:पहले भी रासायनिक सुगंध थी; वर्तमान में भी कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स और सुगंध मौजूद हैं।
  • सेवन का तरीका: पहले सीधे पैकेट खोलकर खाते; अब दोनों पाउच खरीदकर, हथेली पर मिलाकर सेवन करते हैं।
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