नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ किया है कि रूस चाहता है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष जल्द से जल्द खत्म हो। उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि ईरान से जुड़े तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट में रुकावट के कारण तेल की कीमतें बढ़ने से मॉस्को को फायदा होता है।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने कहा कि ईरान के लोगों ने मौजूदा संकट के दौरान एकता और हिम्मत दिखाई है। भविष्य में किसी भी समझौते में उनके हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
हालात से फायदा उठाने की अटकलों का किया खारिज
इलाके में अस्थिरता के कारण तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से रूस को फायदा हो सकने की अटकलों पर पुतिन ने इस दावे को खारिज कर दिया। कहा कि रूसी ऊर्जा कंपनियों को होने वाला कोई भी फायदा अस्थायी होगा।
उन्होंने कहा, ‘ये सिर्फ अटकलें हैं कि ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती कीमतों से रूस ही एकमात्र हिस्सेदार और फायदा उठाने वाला देश है। कुछ हद तक हमारी कंपनियों को इससे फायदा होता है। लेकिन, यह सिर्फ अस्थायी और कम समय के लिए होता है।’पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस की प्राथमिकता ऊर्जा बाजार से होने वाले अल्पकालिक फायदों के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता है।
उन्होंने कहा, ‘हम आपसी हितों के आधार पर सभी के साथ दीर्घकालिक, स्थिर संबंध बनाना चाहते हैं। इस मामले में हमारा हित संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करना है।’
संघर्ष खत्म करने में की मदद की पेशकश
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि मॉस्को जरूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार है। किसी भी ऐसे नतीजे का स्वागत करेगा जिससे संघर्ष खत्म हो सके।
पुतिन ने कहा, ‘अगर रूस कुछ कर सकता है तो हम हमेशा मदद के लिए तैयार हैं। अगर नहीं तो हम सभी के साथ संघर्ष के खत्म होने का स्वागत करेंगे।’
उन्होंने कहा, ‘हम इस बात का स्वागत करते हैं कि कुछ मुश्किलों के बावजूद संघर्ष-विराम लागू हो गया है।’
भारत-रूस संबंधों पर बोले पुतिन
बातचीत के दौरान पुतिन ने भारत के साथ रूस के संबंधों की भी तारीफ की। नई दिल्ली को मॉस्को के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक बताया।
उन्होंने कहा, ‘हम भारत के साथ अपने संबंध विकसित कर रहे हैं। ऐसा करना जारी रखेंगे। हम भारत को एक बहुत भरोसेमंद साझेदार मानते हैं।’रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत पर दबाव बनाने की पश्चिमी देशों की कोशिशों के सफल होने की संभावना कम है।
दोनों देशों के बीच सहयोग के लंबे इतिहास का जिक्र करते हुए पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को ‘खास विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ बताया।