भोपाल में रोज लापता हो रही हैं 2 नाबालिग बेटियां; सोशल मीडिया और ‘जान-पहचान’ वाले बने सबसे बड़ा खतरा

भोपाल। राजधानी भोपाल में मासूम और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में हर दिन औसतन दो नाबालिग बेटियां लापता हो रही हैं।चौंकाने वाली बात यह है कि इन बच्चियों के गायब होने या अपहरण के पीछे किसी अजनबी गिरोह से ज्यादा उनके अपने ‘जान-पहचान वाले’ और ‘सोशल मीडिया’ के जरिए संपर्क में आए लोग सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। पिछले तीन वर्षों में ही भोपाल के अलग-अलग थानों में ऐसे 1,900 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

आंकड़ों की जुबानी: साल-दर-साल बढ़ रहा है ग्राफ

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, भोपाल में हर साल 600 से अधिक बालिकाओं के लापता होने पर अपहरण के प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं।
चिंता की बात यह है कि इस साल के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही 300 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं, जो इस बात का साफ संकेत है कि यदि यही रफ्तार रही तो 2026 के अंत तक यह आंकड़ा फिर 600 के पार पहुंच सकता है।

बेहतर जिंदगी’ का झांसा और सोशल मीडिया का मायाजाल

पुलिस की शुरुआती जांच और काउंसलिंग में यह बात सामने आई है कि बच्चियां किसी न किसी बहकावे में आकर कदम उठा रही हैं।।
उम्र का दायरा: लापता होने वाली बच्चियों की उम्र 6 से 17 वर्ष के बीच है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा 12 से 17 साल की किशोरियों का है, लेकिन 6 से 10 साल की मासूम बच्चियों के गायब होने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं।
मुख्य कारण: अधिकांश मामलों में ऑनलाइन फ्रेंडशिप, प्रेम प्रसंग, नौकरी या चकाचौंध भरी जिंदगी के झांसे जैसी वजहें सामने आई हैं।

गंभीर आशंकाएं: पुलिस और समाजशास्त्रियों को अंदेशा है कि कई मामलों के पीछे मानव तस्करी , जबरन श्रम और गंभीर शोषण जैसे काले रैकेट भी सक्रिय हो सकते हैं।

तलाश के लिए विशेष टीमें; लेकिन शुरुआती जांच में मुश्किलें

पुलिस प्रशासन का कहना है कि बच्चियों की तलाश के लिए साइबर सेल, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल ट्रैकिंग की मदद से विशेष टीमें बनाई जाती हैं और ज्यादातर बच्चियों को सुरक्षित बरामद भी कर लिया जाता है।
हालांकि, पुलिस ने यह भी स्वीकार किया कि कई बार बच्चियां खुद ही घर छोड़कर चली जाती हैं, जिससे उनके बारे में सटीक जानकारी जुटाने और शुरुआती जांच को आगे बढ़ाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

अभिभावकों के लिए ‘साइबर अलर्ट’

– अपने बच्चों की सोशल मीडिया एक्टिविटी और उनके फ्रेंड सर्कल पर नजर रखें।
– बच्चों से संवाद बनाए रखें ताकि वे किसी बाहरी व्यक्ति के झांसे या ‘फेक आईडी’ के बहकावे में न आएं।
– अनजान लोगों द्वारा दिए जा रहे बड़े ऑफर्स (नौकरी/मॉडलिंग) की सत्यता जांचें।

Spread the love