भोपाल। रेलवे की सुपरफास्ट ट्रेनों की तेज रफ्तार यात्रियों के लिए भले सुविधा बन रही हो, लेकिन पार्सल सेवा के लिए यही गति कई जगह चुनौती बनती दिख रही है।स्थिति यह है कि समय बचाने के लिए सुपरफास्ट ट्रेनों से भेजे जा रहे पार्सल कई बार तय स्टेशन तक पहुंचने के बाद भी समय पर अनलोड नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर व्यापारियों, छोटे कारोबारियों और पार्सल प्राप्त करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
सचखंड, मालवा और केरला एक्सप्रेस में पार्सल का ‘संकट’, डिलीवरी में लग रहे 4-4 दिन
जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा परेशानी केरला सुपरफास्ट एक्सप्रेस, सचखंड सुपरफास्ट एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस और खुशीनगर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में सामने आ रही है। इन ट्रेनों में पार्सल बुकिंग अधिक रहती है, लेकिन अधिकांश स्टेशनों पर इनका ठहराव केवल करीब पांच मिनट का होने के कारण पार्सल उतारने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
रेलवे सूत्रों के अनुसार कई बार पार्सल वैन में सामान की संख्या अधिक होती है और सीमित समय में पूरे पार्सल को उतारना चुनौती बन जाता है। ऐसे मामलों में कुछ पार्सल अगले स्टेशन तक चले जाते हैं या बाद में वापस भेजने की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इससे डिलीवरी में तीन से चार दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है और पार्सल ट्रैकिंग को लेकर भी शिकायतें बढ़ती हैं।
स्थिति को और कठिन बनाने वाला एक कारण स्टाफ की कमी भी बताई जा रही है। क्योंकि प्रतिदिन लगभग दो हजार से ज्यादा पार्सल लोडिंग और ढेड़ हजार पार्सल अनलोडिंग के लिए बुक हो रहे हैं। तो वहीं कई स्थानों पर पार्सल लोडिंग और अनलोडिंग के लिए उपलब्ध कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव रहता है। कम समय, ज्यादा पार्सल और सीमित मानव संसाधन के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
इस समस्या का असर केवल रेलवे संचालन तक सीमित नहीं है। व्यापारी समय पर माल नहीं पहुंचने से आर्थिक नुकसान की बात कर रहे हैं, वहीं आम लोग जरूरी दस्तावेज, घरेलू सामान या अन्य पार्सल देर से मिलने से परेशान हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी इस संबंध में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
केस-1
अश्वनि राठौर ने लोकमान्य तिलक टर्मिनल (01073) से करीब नौ किलो का पार्सल बुक कराया था। उम्मीद थी कि पार्सल तय समय में पहुंच जाएगा, लेकिन अनलोडिंग में देरी के कारण उन्हें अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा।
केस-2
पराग गुप्ता ने नागपुर से भोपाल जंक्शन के लिए पार्सल बुक कराया था, लेकिन ट्रेन पहुंचने के बाद भी पार्सल अनलोड नहीं हो सका। इससे उन्हें बार-बार जानकारी लेने और अतिरिक्त समय खर्च करना पड़ा।
हालांकि रेलवे अधिकारियों के अनुसार व्यवस्था में सुधार करने के प्रयासों का दावा किया जा रहा है। जबकि लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच अब सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे को अधिक पार्सल लोड वाली सुपरफास्ट ट्रेनों में अतिरिक्त अनलोडिंग समय, अतिरिक्त स्टाफ या अलग पार्सल प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।