रायपुर, छत्तीसगढ़ के गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को मुफ्त और आधुनिक पैथोलॉजी जांच की सुविधा देने के लिए साल 2020 में शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘हमर लैब’ योजना बंद की जा रही है। बड़ा खेल यह है कि जिस सरकारी सिस्टम को मजबूत करना था, उसे अब पूरी तरह निजी कंपनी की झोली में डाल दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को एचएलएल के माध्यम से निजी कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत रायपुर, मुंगेली, धमतरी और कांकेर जिले की हमर लैब बंद हो चुकी हैं, जबकि शेष छह जिलों की लैब भी जल्द बंद कर दी जाएंगी।
सबसे बड़ा सवाल उन करोड़ों रुपए की मशीनों और उपकरणों को लेकर खड़ा हो गया है, जिनकी खरीद पर भारी सरकारी खर्च हुआ था। रायपुर जिला अस्पताल की हमर लैब में ही करीब 50 लाख रुपए की मशीनें लगी थीं। चार जिलों में बंद हुई लैब के उपकरणों की कीमत लगभग दो करोड़ रुपए आंकी जा रही है। अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि मशीनों और उपकरणों को हटाकर सुरक्षित रखा जाए, क्योंकि नई व्यवस्था में निजी कंपनी अपनी मशीनों से जांच करेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अगले छह माह में जिला अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाएं भी इसी व्यवस्था के तहत निजी कंपनी को सौंप दी जाएंगी।
जिन जिलों में हमर लैब संचालित नहीं थीं, वहां की पारंपरिक सरकारी पैथोलॉजी लैब भी निजी कंपनी को हस्तांतरित की जा रही हैं। इन जिलों में संचालित थीं हमर लैब: रायपुर, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, मुंगेली, बीजापुर और बलरामपुर।
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट – कहीं सामान डिब्बों में बंद, कहीं लैब सीमित
राजधानी के जिला अस्पताल की हमर लैब को राज्य की सबसे बेहतर माना जाता था। यहां 120 प्रकार की जांचें पूरी तरह नि:शुल्क होती थीं। लैब बंद होने से मशीनों को एक कमरे में रख दिया गया है। कुछ उपकरण कार्टन में पैक हैं, कुछ को पॉलीथिन से ढंका गया है, जबकि कई मशीनें खुली अवस्था में रखी हुई हैं। इनमें कई मशीनें लगभग नई हैं, लेकिन इनके भविष्य को लेकर अस्पताल स्तर पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
बिलासपुर: कॉर्डिनेशन की कमी से जांच प्रभावित जिला अस्पताल में पहले 12 कर्मचारी थे, अब एचएलएल के 12 कर्मचारी और जुड़ गए हैं। रिएजेंट्स की कमी दूर होने के बाद अधिकांश जांचें शुरू हुई हैं, लेकिन दोनों टीमों में समन्वय के अभाव से जांच और रिपोर्ट में लगातार देरी हो रही है।
मुंगेली: एक कमरे में समेटी लैब, 60 प्रकार की जांच बंद मुंगेली जिला अस्पताल में भी हमर लैब के उपकरणों को एक कमरे में रख दिया गया है। यहां 50 से 60 प्रकार की प्रमुख जांचें होती थीं। करीब एक माह पहले निजी कंपनी ने अपना सेटअप स्थापित किया, जिसके बाद पुरानी मशीनों को हटाकर अलग कर दिया गया।
रायगढ़: नई नहीं, पुरानी व्यवस्था के भरोसे लैब जिला अस्पताल में करीब 75 तरह की जांचें हो रही हैं, लेकिन सभी पुरानी सरकारी मशीनों से की जा रही हैं। एचएलएल के कर्मचारी पहुंच चुके हैं, पर कंपनी की नई मशीनें अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित है।
जांजगीर-चांपा: 62 जांचें, रिपोर्ट के लिए रोज हंगामा जिला अस्पताल में रिपोर्ट नहीं मिलने से मरीज और परिजन रोज हंगामा कर रहे हैं। भीड़ नियंत्रित करने गार्ड लगाने पड़ रहे हैं। 134 में से सिर्फ 62 जांचें हो रही हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण हिस्टोपैथोलॉजी, साइटोलॉजी और हार्मोन जांचें बंद हैं।
धमतरी: रिपोर्ट नहीं मिली, ब्लड सैंपल तक गायब जिला अस्पताल में जांच और रिपोर्टिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। 11 जून को भेजे गए ब्लड सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिलने से इलाज प्रभावित हुआ। बाद में शिकायत में कई मरीजों के हैंडओवर किए गए ब्लड सैंपल लैब से गायब बताए गए।
स्वास्थ्य विभाग इस भारी-भरकम विफलता पर जो तर्क दे रहा है, वह बेहद हास्यास्पद है। अफसरों का कहना है कि हमर लैब में अक्सर रीजेंट और केमिकल की कमी हो जाती थी, जिससे जांचें समय पर नहीं होती थीं। इसी कारण जांच व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपी जा रही है। विभाग के अनुसार मरीजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। जांच का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी, जबकि निजी कंपनी अपनी मशीनों और उपकरणों के जरिए सेवाएं उपलब्ध कराएगी।