तेहरान: अमेरिका के साथ हालिया दिनों में बढ़ी तनातनी के बीच ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण बना रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने तक उनके देश की सेना के कंट्रोल में है। अराघची का ये बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज के आसपास अमेरिका ने ईरानी संपत्तियों पर हमले किए हैं। ईरान की ओर से भी खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी अटैक किए गए हैं। इससे दोनों पक्षों में तनाव काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर ड्रोन अटैक और अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे पर हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का ये बयान आया है। बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में अब्बास अराघची ने साफ किया कि अमेरिका के साथ MoU (समझौता ज्ञापन) में ईरान को होर्मुज का नियंत्रण मिला है। ऐसे में कोई भी पक्ष (अमेरिका या अन्य देश) होर्मुज के प्रबंधन में ईरान के तरीके में दखल ना दे।
होर्मुज पर बात करेंगे ईरान-अमेरिका
ईरान और अमेरिका होर्मुज पर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए इस हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में बात करेंगे। अमेरिकी अखबार एक्सियोस ने रविवार को एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि दोनों पक्ष तीन दिन से चल रहे हमले रोककर बातचीत करने के लिए तैयार हुए हैं। दोनों पक्षों के मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में मिलने की उम्मीद है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद को सुलझाया जा सके।
ईरान और अमेरिका ने युद्ध रोकने की सहमति और शुरुआती समझौते के बावजूद बीते कुछ दिनों में एक-दूसरे पर हमले किए हैं। इस तनाव की शुरुआत होर्मुज में एक जहाज पर हमले के बाद हुई। इस हमले के बाद अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरानी की कई साइटों पर बमबारी की। अमेरिकी हमले के बाद ईरान के आईआरजीसी ने रविवार को बहरीन और कुवैत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
होर्मुज पर नहीं बन रही सहमति
ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी एक अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य है। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और फीस लेने के मामले पर विवाद है। ईरान होर्मुज के मामले में पीछे हटने को राजी नहीं है। वहीं अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को को बिना किसी फीस के दुनियाभर के जहाजों के लिए खुलवाकर रहेगा। इस पर दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा लेकिन महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में से है। इसी रास्ते से खाड़ी देशों से तेल और गैस जहाजों के जरिए दुनिया के बाकी हिस्से, खासतौर से भारत और एशियाई देशों में आता है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के 28 फरवरी के हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध के बाद ये समुद्री रूट बुरी तरह प्रभावित है।