इस्लामाबाद: भारत की तरफ से पिछले साल मई महीने में सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के बाद से पाकिस्तान लगातार परेशान है। पाकिस्तान के जल एवं बिजली विकास प्राधिकरण (WAPDA) के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने कहा है कि भारत के फैसले से पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट होगा। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा है कि सिंधु जल संधि सस्पेंड होने से पाकिस्तान आधे समय तक मरुस्थल बना रहेगा जबकि आधे समय तक पानी में डूबा रहेगा।
उन्होंने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब दुनिया ‘वन वॉटर-वन विज़न’ प्रिंसिपल को आगे बढ़ाते हुए शेयर्ड रिवर बेसिन पर गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी को मजबूत करने की सोच रही है तो भारत पूरी तरह से उल्टी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘पाकिस्तान को भुगतने होंगे काफी गंभीर नतीजे’
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने डॉन में लिखा है कि भारत के फैसले पर कानूनी बहस चाहे जो भी हो लेकिन पाकिस्तान के लिए इसके रणनीतिक नतीजे बहुत गंभीर हैं। क्योंकि सिंधु जल संधि पाकिस्तान की पानी, खाने और एनर्जी सिक्योरिटी की गारंटी देता है। उन्होंने लिखा है कि मई 2025 के बाद से भारत ने पश्चिमी नदियों पर अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट को तेज करने का काम तेजी से जारी रखा है। साथ ही रणबीर कैनाल और चिनाब-ब्यास लिंक टनल के काम के साथ साथ दूसरे प्रोजेक्ट्स भी तेजी से लागू किए जा रहे हैं और इन सबका अंजाम अंत में पाकिस्तान के लिए खतरे ही होंगे।
बाढ़ की भविष्यवाणी में नाकामी- पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने लिखा है कि भारत की तरफ से ‘हाइड्रोलॉजिकल डेटा’ यानि नदियों के जलस्तर के आंकड़े रोकने की वजह से पाकिस्तान 2025 के मानसून में बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सका जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
हाइड्रोपावर संकट- पाकिस्तान के पूर्व अधिकारी ने लिखा है कि पाकिस्तान का बिजली उत्पादन और आर्थिक विकास इन पश्चिमी नदियों के लगातार और उनसे पानी के अनुमानित बहाव पर टिका है। पानी रुकने या कम होने से वहां बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
SDGs लक्ष्य हासिल करना असंभव- WAPDA चेयरमैन ने डॉन में लिखा है कि भारत के इन कदमों के कारण पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ (विशेषकर स्वच्छ जल और स्वच्छता से जुड़े लक्ष्य 6.5) को हासिल करना अब नामुमकिन होता जा रहा है।