भोपाल। राजधानी में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया से लगे नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। मास्टर प्लान में इन क्षेत्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए लो-डेंसिटी जोन घोषित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद छोटे-छोटे प्लॉट काटकर उनकी रजिस्ट्री और बिक्री लगातार जारी है। पंजीयन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच हुई 19 हजार रजिस्ट्रियों में से 11,220 रजिस्ट्रियां अकेले इन्हीं क्षेत्रों में हुई हैं।
जानकारी के अनुसार लो-डेंसिटी क्षेत्र में आबादी का दबाव सीमित रखने के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर के भूखंड पर ही निर्माण की अनुमति है। ऐसे प्लाट पर भी अधिकतम 60 वर्गमीटर (करीब 600 वर्गफीट) तक निर्माण किया जा सकता है। इसके विपरीत मौके पर 500 से 2000 वर्गफीट तक के छोटे प्लाट काटकर बेचे जा रहे हैं और उनकी रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। इससे कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित बसाहट तेजी से बढ़ रही है।प्रशासन का कहना है कि हाल ही में पंजीयन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल मास्टर प्लान के आधार पर रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में प्रशासन के पास रजिस्ट्री रोकने का अधिकार सीमित हो गया है, जबकि अवैध कालोनियों का विस्तार लगातार जारी है।
इन इलाकों को लो-डेंसिटी श्रेणी में रखा गया
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मास्टर प्लान में इन संवेदनशील इलाकों को आरजी-5 (लो-डेंसिटी) श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बरखेड़ी कला, बरखेड़ी खुर्द, मेंडोरा-मेंडोरी, खुदागंज, चिचली, बैरागढ़ चिचली, गेहूंखेड़ा, दौलतपुर, चंदनपुरा, प्रेमपुरा, सेवनियां गौड़ सहित कई गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का प्रविधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं होने से बड़े तालाब का कैचमेंट और आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार दबाव में आता जा रहा है।