नर्मदापुरम। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले सैकड़ों किसानों का भुगतान दो महीने बाद भी अधूरा है। जिले में अब भी 6.60 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि खाता नंबरों की त्रुटि के कारण किसानों की भुगतान राशि तमिलनाडु और जयपुर तक के दूसरे खातों में पहुंच गई। राशि वापस मंगाने के लिए संबंधित बैंक खातों को तत्काल होल्ड कराना पड़ा।
दूसरी ओर, बार-बार ईपीओ इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ऑर्डर फेल होने और उपार्जन केंद्रों पर गेहूं की शॉर्टेज ने भी भुगतान प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
अब भी 6.60 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है
जिले में इस वर्ष 55 हजार 540 किसानों से समर्थन मूल्य पर करीब 5.84 लाख टन गेहूं की खरीदी की गई, जिसकी कुल राशि लगभग 1,530 करोड़ रुपये है। अधिकांश किसानों के खातों में भुगतान पहुंच चुका है, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अब भी 6.60 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
गलत बैंक खातों ने बढ़ाई परेशानी
नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के अनुसार, किसानों द्वारा पंजीयन के दौरान दर्ज कराए गए बैंक खातों में नाम, खाता संख्या या आईएफएससी कोड की त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में ईपीओ फेल हो रहे हैं। कई मामलों में राशि दूसरे व्यक्तियों के खातों में पहुंच गई। ऐसे मामलों में संबंधित बैंक शाखाओं को तत्काल पत्र लिखकर खातों को होल्ड कराया गया, ताकि राशि वापस मंगाकर वास्तविक किसान के खाते में भेजी जा सके।
तीन मामलों ने खोली व्यवस्था की पोल
जयपुर पहुंची 4.21 लाख रुपये की राशि – रूपादेह स्वसहायता समूह के उपार्जन केंद्र साईं कृपा वेयरहाउस पर गेहूं बेचने वाले किसान रामकिशन मेहरा के 4.21 लाख रुपये स्टेट बैंक आफ इंडिया की जयपुर शाखा में एक महिला के खाते में पहुंच गए। मामला सामने आने पर बैंक को पत्र लिखकर खाता होल्ड कराया गया और राशि वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
दूसरे खातेदार के खाते में पहुंचे 90 हजार रुपये
रोहना समिति के नर्मदा वेयरहाउस बरंडुआ उपार्जन केंद्र पर गेहूं बेचने वाली किसान रामवती बाई के 90,561 रुपये मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक के एक अन्य खातेदार के खाते में पहुंच गए। बाद में बैंक को पत्र भेजकर भुगतान पर रोक लगाई गई।
तमिलनाडु पहुंच गया किसान का भुगतान
जिला सहकारी बैंक की उमरधा शाखा के एक किसान का भुगतान तमिलनाडु के आलंगुडी स्थित कैनरा बैंक शाखा के खातेदार के खाते में पहुंच गया। जानकारी मिलते ही संबंधित शाखा से संपर्क कर खाते को होल्ड कराया गया और राशि वापस लाने की कार्रवाई शुरू की गई।
4700 क्विंटल गेहूं की शॉर्टेज भी बनी वजह
भुगतान अटकने का एक बड़ा कारण उपार्जन केंद्रों से वेयरहाउस तक परिवहन के दौरान सामने आई 4,700 क्विंटल से अधिक गेहूं की शॉर्टेज भी है। जिन समितियों में शॉर्टेज मिली है, वहां के किसानों का भुगतान फिलहाल प्रभावित हुआ है। निगम का कहना है कि शॉर्टेज की राशि संबंधित समिति और परिवहनकर्ता से वसूली जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर खरीदी कमीशन से समायोजन कर किसानों का भुगतान कराया जाएगा।
जिले में किसानों का करीब 6.60 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। बार-बार ईपीओ फेल होने और बैंक खातों की त्रुटियों के कारण भुगतान प्रभावित हुआ है। जिन मामलों में राशि दूसरे खातों में चली गई थी। संबंधित बैंक शाखाओं को पत्र लिखकर खाते होल्ड कराए गए हैं और राशि वापस मंगाई जा रही है। वहीं शॉर्टेज की वसूली संबंधित समितियों और परिवहनकर्ताओं से की जाएगी।
-सुरेश सनखेरे, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम, नर्मदापुरम