भोपाल। प्रदेश में लगातार बदलते साइबर अपराधों के स्वरूप और बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य में 25,000 या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर भी ई-जीरो प्राथमिकी दर्ज की जा सकेगी।
साइबर अपराधों पर MP पुलिस का बड़ा कदम; अब 25 हजार के फ्रॉड पर भी दर्ज होगी ई-जीरो FIR
इससे पहले यह सुविधा केवल 1 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों में ही उपलब्ध थी। मप्र पुलिस ने ई-जीरो एफआईआर की न्यूनतम सीमा में सीधे 75,000 रुपये की कटौती कर दी है। इस फैसले से अब पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्या में साइबर ठगी पीड़ितों को तत्काल कानूनी संरक्षण और शुरुआती पुलिस कार्रवाई का फायदा मिल सकेगा।
एसपी प्रणय नागवंशी के अनुसार, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में ठगी के तुरंत बाद के शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है।
यदि पीड़ित इस समय के दौरान बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन पर या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवा देता है, तो संबंधित एजेंसियां और बैंक आपस में त्वरित समन्वय कर अपराधियों द्वारा पैसा निकाले जाने से पहले ही उस खाते/रकम को फ्रीज (होल्ड) करवा सकते हैं । इससे पीड़ित की गाढ़ी कमाई वापस मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
मध्य प्रदेश में 25 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘ई-जीरो एफआईआर प्रणाली’ की शुरुआत की थी । उस समय यह सुविधा केवल 1 लाख रुपये से अधिक की ठगी पर लागू थी, जिसे अब घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए तीन प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आपस में एकीकृत किया गया है
1. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी)
2. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी)
3. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस)
इन तीनों सिस्टम्स के एक साथ काम करने से शिकायत दर्ज होते ही स्वतः ई-एफआईआर जनरेट हो जाएगी और बिना किसी मानवीय देरी के मामला संबंधित थाने तक पहुंच जाएगा।
चरण 1: पीड़ित सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करेगा या NCRP पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करेगा।
चरण 2: दर्ज शिकायत CCTNS प्रणाली के माध्यम से स्वतः (ऑटोमैटिक) ई-जीरो एफआईआर में बदल जाएगी।
चरण 3: पीड़ित को तुरंत उसके मोबाइल/ईमेल पर ई-जीरो एफआईआर नंबर प्राप्त हो जाएगा।
चरण 4: राज्य साइबर पुलिस पूरे मामले की प्राथमिक समीक्षा करेगी और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए केस संबंधित स्थानीय पुलिस थाने को ट्रांसफर कर देगी।