रियाद: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सऊदी अरब के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री शहजादे फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सहित क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही बंद है और अब हूतियों ने सऊदी अरब की नौसैनिक घेराबंदी कर दी है। इस कारण सऊदी अरब को भारत आ रहे अपने तेल टैंकर को लाल सागर से वापस बुलाना पड़ा है। वहीं, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मजबूत होते सैन्य संबंध भी भारत के लिए चिंता की बात है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के अनुसार, डोभाल ने सोमवार को रियाद में शहजादे फैसल से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। इस वर्ष डोभाल की सऊदी अरब की यह तीसरी यात्रा है मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, "दोनों पक्षों ने क्षेत्र के ताजा घटनाक्रमों तथा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों पर भी चर्चा की।" इस बैठक में सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री सऊद अल-साती भी मौजूद थे।
हूतियों ने ईरान की नौसैनिक घेराबंदी की
डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ ‘‘समुद्री नाकाबंदी’’ की घोषणा करते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के जहाजों को रोकने की बात कही है। हूतियों का दावा है कि यह कदम यमन के उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों के बंदरगाहों और हवाई अड्डों की कथित नाकाबंदी के जवाब में उठाया गया है। सऊदी अरब ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
होर्मुज के फिर से बंद होने से बढ़ा ऊर्जा संकट
अमेरिका और ईरान में फिर से लड़ाई शुरू होने से होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन फिर बंद हो गया है। इस कारण भारत के ऊर्जा आयात को तगड़ा झटका लगा है। होर्मुज से हर साल दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इसका बड़ा हिस्सा भारत आता है। होर्मुज के बंद होने से भारत में तेल और प्राकृतिक गैस का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, सरकार ने अपन ऊर्जा आयात को ग्लोबलाइज कर इस संकट को कम करने की कोशिश की है।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा संबंध भी चिंता की बात
पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रक्षा समझौता किया था। इस समझौते के तहत एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। इस कारण दोनों देशों के संबंध एक अलग स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे भारत की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि सऊदी अरब न सिर्फ तेल और गैस का एक बड़ा उत्पादक देश है, बल्कि मुस्लिम वर्ल्ड में उसकी ताकत भी काफी ज्यादा है। भारत और सऊदी अरब के व्यापारिक संबंध भी काफी मजबूत हैं, जिन पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।