स्विगी में डिलीवरी की, एक्सीडेंट में पैर टूटा… फिर इस एक आइडिया ने बना दिया करोड़पति

नई दिल्ली: जिंदगी में जब सब कुछ खत्म होता नजर आता है, तब कभी-कभी वहीं से एक नई और शानदार शुरुआत का रास्ता भी निकलता है। उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले अजीत कुमार की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी परिवार का कर्ज चुकाने के लिए 16-16 घंटे साइकिल चलाकर फूड डिलीवरी करने वाले अजीत, आज देश के सबसे सफल ऑडियो-फिक्शन राइटर (Audio-fiction Writer) में से एक बन चुके हैं। यही नहीं, वह 1 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुके हैं।

सड़क हादसे से सब तोड़ दिया

कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार का कारोबार ठप होने और सिर पर भारी कर्ज होने के कारण अजीत को अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। परिवार की मदद के लिए वे फरीदाबाद में स्विगी (Swiggy) के डिलीवरी बॉय बन गए। कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए वे रोजाना 100 किलोमीटर तक साइकिल चलाते और 16-16 घंटे काम करते थे।

जब हालात थोड़े संभल ही रहे थे, तब एक सड़क हादसे ने अजीत को गंभीर रूप से घायल कर दिया। कई फ्रैक्चर के कारण वे महीनों के लिए बेड पर आ गए। आय का एकमात्र जरिया भी छिन चुका था और परिवार पर अनिश्चितता के बादल छा गए।

अस्पताल के बेड से शुरू हुआ नया सफर

अस्पताल के बेड पर रिकवरी के दौरान अजीत ने वर्क-फ्रॉम-होम के मौके तलाशने शुरू किए। इस दौरान उन्हें ऑडियो प्लेटफॉर्म पॉकेट एफएम पर लिखने के एक अवसर के बारे में पता चला। उन्होंने हिम्मत जुटाकर कहानी लिखना शुरू किया।

अस्पताल के बेड से ही वे रोज कई एपिसोड लिखने लगे। 3 महीने के भीतर उनकी एक कहानी पॉकेट एफएम के राइटिंग कॉन्टेस्ट में टॉप कर गई। उन्हें पहली पेमेंट 20,000 रुपये की मिली, जिसे उन्होंने सीधे अपनी मां को सौंप दिया। अगले महीने कमाई 52,000 रुपये हुई और धीरे-धीरे उनकी कहानियों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि एक महीने का पे-आउट 6.29 लाख रुपये तक पहुंच गया।

परिवार का पूरा कर्ज उतारा

आज अजीत पॉकेट एफएम की ब्लॉकबस्टर ऑडियो सीरीज ब्रह्मयोद्धा: द डिस्ट्रॉयर (Brahmyodha: The Destroyer) के लीड राइटर हैं। वह इस शो के 1,000 से अधिक एपिसोड लिख चुके हैं, जिसे 16.8 करोड़ से ज्यादा बार सुना जा चुका है।

अपनी इस असाधारण सफलता के दम पर अजीत ने न केवल अपने परिवार का पूरा कर्ज उतारा, बल्कि खुद 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए। उन्हें प्रतिष्ठित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival) में बतौर वक्ता भी आमंत्रित किया गया।

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