यूक्रेन जंग में मिली नाकामी तो भारत के स्वदेशी टैंक प्रोग्राम पर दांव लगा रहा दोस्‍त रूस, की बड़ी पेशकश

मॉस्को/नई दिल्ली: भारत बिजली की रफ्तार से ‘फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल’ (FRCV) और ‘फ्यूचर मेन बैटल टैंक’ (FMBT) प्रोग्राम के तहत अपने खुद के बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों का तेजी से विकास कर रहा है। भारत का मकसद स्वदेशी स्तर पर टैंकों का निर्माण करना है। भारत पहले रूसी टैंकों पर निर्भर रहा है लिहाजा अब मॉस्को ने नई दिल्ली के मुख्य रक्षा सहयोगी होने के नाते एक नया व्यावहारिक रूख अपनाया है। रूस ने भारत की आत्मनिर्भरता की नीति से मुंह फेरने के बजाए खुद को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने वाले देश के तौर पर पेश किया है।

रूस अब भारत को ऐसे एडवांस्ड प्लेटफॉर्म, जॉइंट प्रोडक्शन और इंडस्ट्रियल सहयोग की पेशकश कर रहा है जो भारत के भविष्य के बख्तरबंद वाहन रोडमैप में मददगार साबित हो सकते हैं। रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी ‘रोसोबोरोनएक्सपोर्ट’ ने भारत को एडवांस्ड T-90MS मेन बैटल टैंक के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। यह डील दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा-औद्योगिक सहयोग को और मजबूत कर सकती है।

रूस के साथ मिलकर T-90 टैंक बनाएगा भारत?

इस पहल को T-90 के सफल उत्पादन सहयोग के 25 वर्षों के अनुभव को आगे बढ़ाने और भारतीय सेना को दुनिया के सबसे सक्षम और आधुनिक मेन बैटल टैंकों में से एक उपलब्ध कराने के अवसर के रूप में पेश किया गया है। T-90MS रूस के T-90 परिवार का लेटेस्ट संस्करण है और इसमें रूसी सेना के T-90M के लिए विकसित कई तकनीकी सुधार शामिल हैं।

रूस की रणनीति कई दशकों से चले आ रहे रक्षा संबंधों की वास्तविकता को दर्शाती है। भारतीय सेना का आर्मर्ड कोर (बख्तरबंद दस्ता) मुख्य रूप से रूसी मूल के उपकरणों पर आधारित है जिसमें T-72 ‘अजेय’ और T-90S ‘भीष्म’ इसके टैंक बेड़े की रीढ़ हैं। इसे देखते हुए ‘रोसोबोरोनएक्सपोर्ट’ ने इस प्रस्ताव को भारत में दो दशकों से ज्यादा के सफल लाइसेंस-आधारित उत्पादन को आगे बढ़ाने और साथ ही रूसी सेना के T-90M से ली गई तकनीकों को शामिल करने के अवसर के रूप में पेश किया है।

रूस ने भारत को जो प्रस्ताव दिया है उनमें क्या है?

रूस की प्रस्तावित T-90MS प्रस्ताव में ज्यादा ताकतवर 1,130-हॉर्सपावर का इंजन, नए डिजाइन वाला बुर्ज, बेहतर आर्मर सुरक्षा, एडवांस्ड फायर-कंट्रोल सिस्टम, बेहतर थर्मल इमेजिंग, डिजिटल बैटलफील्ड मैनेजमेंट क्षमताएं और दूसरी खूबियां शामिल हैं जिनका मकसद लड़ाई में टिके रहने की क्षमता और लड़ने की असरदार ताकत को बढ़ाना है। सीधे आयात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर उत्पादन का प्रस्ताव देकर रूस भारत के स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर देने के नजरिए के साथ अपने प्रस्ताव को मिला रहा है।

T-90MS के अलावा रूस ने लगातार अपने आर्मर्ड प्लेटफॉर्म की ऑपरेशनल मैच्योरिटी यानि काम करने की परिपक्वता पर जोर दिया है। रूसी रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि अक्सर T-90 सीरीज के बड़े ऑपरेशनल अनुभव का ज़िक्र करते हैं। उनका तर्क है कि पूरी तरह से नए डेवलपमेंट प्रोग्राम की तुलना में पहले से साबित हो चुके प्लेटफॉर्म में तकनीकी जोखिम कम होता है और उन्हें सेना में तेजी से शामिल किया जा सकता है। हालांकि ऐसे दावे रूस की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा हैं लेकिन ये भारत के बदलते आर्मर्ड व्हीकल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बने रहने की मॉस्को की कोशिशों को भी दिखाते हैं।
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