गिरते बाजार में उछल गए टाटा ग्रुप के शेयर, कहां से मिली ‘गुड’ न्यूज

नई दिल्ली: मिलेजुले वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमत में तेजी के बीच आज घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। इस बीच देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप के शेयरों में 7% तक तेजी आई। RBI ने ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की लिस्ट में बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद मौजूदा नियमों के तहत टाटा संस के लिए लिस्टिंग जरूरी हो गई है। हालांकि आरबीआई ने साथ ही कहा कि वह टाटा संस की उस अर्जी की जांच कर रहा है जिसमें उसने अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का अनुरोध किया है।

इससे शुक्रवार को टाटा इनवेस्टमेंट और टाटा केमिकल्स के शेयरों में 7% तक की तेजी आई। टाटा केमिकल्स का शेयर बीएसई पर पिछले सत्र में 663.25 रुपये पर बंद हुआ था और आज 679.55 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान यह 701.75 रुपये तक गया। इसी तरह टाटा इनवेस्टमेंट का शेयर कल 667.05 रुपये पर बंद हुआ था जबकि आज 666.90 रुपये पर खुले। कारोबार के दौरान यह 713 रुपये तक गया।

क्या है पेच?

टाटा संस की 31 मार्च, 2026 तक की कुल एसेट 2.01 लाख करोड़ रुपये थी। इससे मौजूदा नियमों के तहत इसे अपर-लेयर NBFC कैटेगरी में शामिल करना जरूरी हो गया। इसकी बड़ी संपत्ति के कारण कंपनी के लिए CIC के तौर पर डी-रजिस्ट्रेशन पाना भी मुश्किल हो सकता है। सेंट्रल बैंक ने कहा है कि 31 दिसंबर तक डी-रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ वही कंपनियां योग्य होंगी जिनके पास पब्लिक फंड नहीं है, जिनका ग्राहकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है और जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है।

RBI ने यह भी साफ किया कि एक बार जब किसी NBFC को अपर-लेयर कंपनी का दर्जा मिल जाता है, तो वह कम से कम पांच साल तक कड़े रेगुलेटरी नियमों के दायरे में रहेगी, भले ही बाद की जांच में वह जरूरी शर्तों को पूरा न करे। मतलब जो कंपनियां पहले अपर-लेयर NBFC के तौर पर क्लासिफ़ाई की गई थीं, लेकिन ताजा समीक्षा में योग्य नहीं पाई जातीं, वे भी इसी कैटेगरी में बनी रहेंगी और उन पर कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होंगे।

लिस्टिंग पर मतभेद

टाटा ट्र्स्ट्स की टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट्स ने जुलाई 2025 में टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाए रखने का प्रस्ताव पास किया था। हालांकि टाटा के दो ट्रस्टी विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ने सार्वजनिक रूप से टाटा संस को लिस्ट करने का समर्थन किया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा भी टाटा संस को अनलिस्टेड रखने के पक्ष में हैं।

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