भोपाल । राजधानी में अमृत-2.0 के तहत चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति अब ठेकेदारों पर भारी पड़ गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश में सीवेज परियोजनाओं पर काम करने वाली पांच एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है, जिसमें भोपाल नगर निगम में काम करने वाली दो एजेंसियां भी शामिल हैं।इससे शहर में लंबे समय से चल रहे सीवेज नेटवर्क के काम में देरी और उसकी निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अमृत मिशन जैसे जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट में लापरवाही और अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
MP में अमृत-2.0 योजना की कछुआ चाल पर बड़ा एक्शन : सीवेज प्रोजेक्ट में देरी पर भोपाल समेत 5 शहरों की एजेंसियां ब्लैक लिस्ट
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल नगर निगम की अमृत-2.0 सीवरेज परियोजना पैकेज-दो का काम मेसर्स जयवरूदी इंफ्राकान प्राइवेट लिमिटेड और पैकेज-तीन का काम मेसर्स एलसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
दोनों परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण विभाग ने संबंधित फर्मों को ब्लैक लिस्ट करने का निर्णय लिया है।
यह दोनों पैकेज राजधानी में सीवेज नेटवर्क को मजबूत करने और नई सीवरेज सुविधाओं के निर्माण से जुड़े हैं। परियोजनाओं में देरी का सीधा असर उन इलाकों पर पड़ रहा है, जहां सीवेज नेटवर्क से जुड़े काम लंबे समय से चल रहे हैं।
साथ ही बारिश के दौरान निर्माण कार्य चलने से रहवासियों को कीचड़ की वजह से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भोपाल में काम करने वाली दो एजेंसियों के अलावा सतना, देवास और पीथमपुर की सीवेज परियोजना पर काम कर रहीं एजेंसियों को भी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है।
इनमें देवास नगर निगम की मेसर्स दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकान प्राइवेट लिमिटेड, सतना नगर निगम की मेसर्स इनविराड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और पीथमपुर नगर पालिका मेसर्स आरएंडबी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (पीथमपुर) शामिल हैं।
अमृत-2.0 की अल्प प्रगति वाली परियोजनाओं की समीक्षा के लिए 13 अगस्त को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें भोपाल सहित प्रदेश की पांच परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों को जारी किए गए सूचना पत्र, उनके जवाब और निगम के अभिमत पर विस्तार से चर्चा की गई।
परियोजनावार समीक्षा के बाद दोनों फर्मों को ब्लैक लिस्ट करने का निर्णय लिया गया। ब्लैक लिस्ट की अवधि में पांचों फर्मों की नई निविदाओं, प्रस्तावों या बोलियों को विभाग और उसके अधीन नगरीय निकायों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।